सुप्रीम कोर्ट ने नितिन गडकरी को बुलाने की जताई इच्छा तो ASG ने किया विरोध, जानिए पूरा मामला
नई दिल्ली। एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को सुनवाई में मदद के लिए कोर्ट में आने की पेशकश की। सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रॉनिक वाहनों में तब्दील करने के मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांगा। इस दौरान सीजेआई एसए बोबडे ने कहा कि कोर्ट चाहता है कि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी आकर बताएं कि दिक्कत कहां आ रही है।

सीजेआई की टिप्पणी का एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने विरोध किया और कहा कि अगर केंद्रीय मंत्री को सर्वोच्च अदालत में बुलाया गया तो इसका राजनीतिक असर पड़ेगा। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल की दलील सुनकर सीजेआई ने कहा कि कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है, ये एक सुझाव है।
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने पूछा कि क्या परिवहन मंत्री अदालत को जानकारी दे सकते हैं। इसे समन की तरह नहीं बल्कि निमंत्रण समझें क्योंकि उन्हें इलेक्ट्रिक वाहनों के बारे में योजना की साफ तस्वीर अधिकारियों से ज्यादा स्पष्ट होगी। कोर्ट ने केंद्र को इस मामले को लेकर 4 हफ्ते में मीटिंग कर विचार करने को कहा। कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण से समझौता नहीं किया जा सकता है।
साथ ही सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि ये मामला केवल दिल्ली-एनसीआर के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए काफी अहम है। बता दें कि इस याचिका में कहा गया है कि सरकार ने सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रॉनिक वाहनों में तब्दील करने की अपनी ही नीति का ढंग से पालन नहीं किया। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की बैटरी को ठीक से चार्ज करने के लिए बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ये योजना एयर पॉल्युशन पर लगाम लगाने और कार्बन उत्सर्जन को सीमित करने के लिए तैयार की गई थी।












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