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CBI और ED चीफ के कार्यकाल बढ़ाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस

सीबीआई और ईडी के प्रमुखों के कार्यकाल बढ़ाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट इस केस में 10 दिन बाद सुनवाई करेगा। sc cbi ed chief tenure extension hearing on plea after 10 days

नई दिल्ली, 02 अगस्त : केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशकों का कार्यकाल बढ़ाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने कहा, ईडी, सीबीआई प्रमुखों के कार्यकाल विस्तार को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 10 दिन बाद सुनवाई होगी।

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अध्यादेश और फैसले को चुनौती

दरअसल, केंद्र सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रमुखों के कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाने का फैसला लिया है। सरकार ने इसके लिए अध्यादेश का रास्ता अपनाया है। अध्यादेश और फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से जवाब मांगा।

दरअसल, केंद्र सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रमुखों के कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाने का फैसला लिया है। सरकार ने इसके लिए अध्यादेश का रास्ता अपनाया है। अध्यादेश और फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से जवाब मांगा।

प्रधान न्यायाधीश (CJI) एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने 15 नवंबर, 2021 के अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर नोटिस जारी किया। इस अध्यादेश के माध्यम से सीबीआई और ईडी की नियुक्ति को नियंत्रित करने वाले केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम और दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम में संशोधन किए गए थे। वर्तमान अध्यादेश से सीवीसी अधिनियम की धारा 25 में संशोधन हुआ। इसके तहत ईडी निदेशक की नियुक्ति और कार्यकाल परिभाषित है।

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं मोहुआ मोइत्रा और साकेत गोखले ने केंद्र सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई है। तीनों ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया है कि ईडी के निदेशक संजय कुमार मिश्रा को सेवा विस्तार देने के लिए संशोधन लाए गए हैं। संजय 1984 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी हैं। नवंबर 2018 में संजय को दो साल के निश्चित कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था। हालांकि, केंद्र ने उन्हें पहले नवंबर 2021 तक सेवा विस्तार दिया। इसके बाद अध्यादेश के माध्यम से नियम बदल दिए गए। केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ एनजीओ कॉमन कॉज ने भी सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

मंगलवार को सुरजेवाला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि ईडी न केवल धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत बल्कि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत भी अपराधों की जांच करता है। उन्होंने बताया कि सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के विपरीत, सीवीसी अधिनियम की धारा 25 के तहत ईडी निदेशक का चयन मुख्य सतर्कता आयुक्त, सतर्कता आयुक्तों और नौकरशाहों की अध्यक्षता वाली एक समिति द्वारा किया जाता है। सिंघवी ने कहा, "यह एक महत्वपूर्ण सवाल है कि ईडी निदेशक की नियुक्ति कौन करता है क्योंकि सभी प्रतिनिधि कार्यपालिका से (representatives are from executive) हैं।"

यह भी दिलचस्प है कि पिछले साल 8 सितंबर को, यह महसूस करते हुए कि उनका कार्यकाल नवंबर 2021 में समाप्त हो रहा है, शीर्ष अदालत ने कहा था कि संजय मिश्रा को और विस्तार नहीं दिया जाना चाहिए और उन्हें विस्तार देने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। गत वर्ष दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि हालिया अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।

केंद्र ने कॉमन कॉज याचिका के खिलाफ बहस करते हुए ईडी महानिदेशक संजय मिश्रा को दिए गए सेवा विस्तार का बचाव किया। सरकार ने कहा कि सीमा पार अपराधों में कुछ लंबित जांचों के पूरा होने तक संजय का सेवा में बने रहना जरूरी है।

अधिवक्ता एमएल शर्मा ने भी इसी मुद्दे पर याचिका दायर की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कहा, नियमों को संशोधित करने वाले अध्यादेश लोक सभा या राज्य सभा में बिना किसी मतदान के पारित किए गए। ऐसे में इसे पारित नहीं माना जा सकता। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि संजय मिश्रा इस साल नवंबर में अपने कार्यालय का चार साल पूरा करेंगे। ऐसे में याचिकाकर्ताओं को आशंका है कि सरकार एक और सेवा विस्तार प्रदान करेगी।

बता दें कि सितंबर 2021 के अपने फैसले में, शीर्ष अदालत ने कहा, "हम तत्काल मामले में दूसरे प्रतिवादी (संजय मिश्रा) के कार्यकाल के विस्तार में हस्तक्षेप करने का इरादा नहीं रखते हैं, क्योंकि उनका कार्यकाल नवंबर, 2021 में समाप्त हो रहा है। हम यह स्पष्ट करते हैं कि दूसरे प्रतिवादी को कोई और विस्तार नहीं दिया जाएगा।"

इसी मामले में कांग्रेस महिला कांग्रेस कमेटी की महासचिव जया ठाकुर ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है, "प्रतिवादी (भारत संघ) ने प्रतिवादी 2 (संजय कुमार मिश्रा) को लाभ देने के एकमात्र उद्देश्य से सीवीसी (संशोधन) अधिनियम 2021 पारित किया।" कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी को ईडी का समन मिलने के बैकग्राउंड में जून 2022 में दायर याचिका में कहा गया है, "वित्त मंत्रालय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) पार्टी के अध्यक्ष और उनके पदाधिकारी के खिलाफ प्रवर्तन एजेंसियों का उपयोग कर रहा है।"

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