'अगर मुझे कुछ हो जाता है तो...,' सत्यपाल मलिक ने सुरक्षा में कमी को लेकर केंद्र सरकार पर उठाए सवाल
जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का कहना है कि उनकी सुरक्षा कम कर दी गई है। उनकी सुरक्षा के लिए एक निजी सुरक्षा अधिकारी तैनात किया जाएगा। सरकार के इस फैसले पर उन्होंने चिंता जाहिर की है।

Delhi: जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपनी सुरक्षा कम किए जाने को लेकर केंद्र की बीजेपी सरकार का जमकर घेराव किया। उन्होंने कहा कि, जेड प्लस सुरक्षा कवर के बजाय अब उनकी सुरक्षा के लिए एक निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) तैनात किया जाएगा। जम्मू और कश्मीर, मेघालय और गोवा के राज्यपाल के रूप में कार्य करने वाले मलिक ने कहा कि उनकी सुरक्षा इसलिए छीन ली गई, क्योंकि उन्होंने किसानों के मुद्दे और केंद्र की अग्निवीर योजना पर बात की थी।
साल 2019 में थे जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल
सत्यपाल मलिक साल 2019 में जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल थे, उस वक्त पूर्ववर्ती राज्य में संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत ऐतिहासिक परिवर्तन किए गए थे। सरकार ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को खत्म कर दिया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया। इसके बाद सत्य पाल मलिक को गोवा के 18वें राज्यपाल के रूप में स्थानांतरित कर दिया गया। सत्यपाल मलिक ने अक्टूबर 2022 तक मेघालय के 21वें राज्यपाल के रूप में काम किया।
'अगर मुझे कुछ होता है दिल्ली आ जाइए'- सत्यपाल मलिक
इंडिया टुडे के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि, 'मैं कहना चाहूंगा कि मैं किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हो रहा हूं। मैं कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं, लेकिन अगर मुझे कुछ होता है तो कृपया दिल्ली आ जाइए।' उन्होंने दावा किया कि 2008 से 2018 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के रूप में कार्य करने वाले एनएन वोहरा का सुरक्षा कवर अभी भी बरकरार थी। सत्यपाल मलिक ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे के बारे में गृह मंत्रालय को लिखा है, लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है कि उनका सुरक्षा कवर क्यों घटाया गया और इस कदम के पीछे क्या कारण था।
सुरक्षा एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर लिए जाते हैं निर्णय
दरअसल, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के परिवार के लिए विशेष रूप से आजीवन सुरक्षा कवर के लिए प्रोटोकॉल लागू है। हालांकि, राज्यपालों और एल-जीएस के लिए सुरक्षा कवर सुरक्षा एजेंसियों से प्राप्त खुफिया जानकारी पर आधारित है।












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