Satya Mohan Joshi का निधन, देहदान कर चुके हैं 103 साल के इतिहासकार और शताब्दी पुरुष

Satya Mohan Joshi Nepal Yuga Purush के नाम से भी लोकप्रिय रहे हैं। शताब्दी पुरुष और इतिहासकार सत्य मोहन जोशी का 103 वर्ष की आयु में निधन हो गया। Satya Mohan Joshi Nepal Yuga Purush demise shatabdi purush

Satya Mohan Joshi Nepal Yuga Purush के नाम से भी लोकप्रिय रहे हैं। शताब्दी पुरुष और इतिहासकार सत्य मोहन जोशी का 103 वर्ष की आयु में चिरनिद्रा में सो गए। इतिहासकार के अलावा सत्य मोहन जोशी को संस्कृति विशेषज्ञ के रूप में भी जाना जाता था। 103 साल के सत्य मोहन जोशी काठमांडूपोस्ट डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले साहित्यकार थे।

प्रोस्टेट और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित

प्रोस्टेट और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित

नेपाल में केआईएसटी मेडिकल कॉलेज एंड टीचिंग हॉस्पिटल के निदेशक सूरज बजराचार्य के मुताबिक, जोशी का रविवार सुबह 7:09 बजे निधन हुआ। खबर के मुताबिक विगत Satya Mohan Joshi का विगत 23 सितंबर से प्रोस्टेट और हृदय संबंधी बीमारियों का इलाज चल रहा था। 10 अक्टूबर को उनकी स्थिति में सुधार नहीं होने पर जोशी को गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में स्थानांतरित किया गया था।

Nepal Yuga Purush ने दान किया शरीर

Nepal Yuga Purush ने दान किया शरीर

शताब्दी पुरुष जोशी के बेटे अनु राज जोशी अस्पताल में उनकी देखभाल कर रहे थे। उन्होंने बताया, जोशी अपना शरीर दान कर चुके हैं, लेकिन परिवार ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि उनके शरीर का क्या करना है। नेपाल युगपुरुष के पुत्र अनु राज के मुताबिक देहदान नया परिदृश्य है क्योंकि हमने इसका कभी अनुभव नहीं किया है।

मेयर ने दी जानकारी

सत्य मोहन जोशी के निधन की खबर सुनने के बाद अस्पताल पहुंचे ललितपुर मेट्रोपॉलिटन सिटी के मेयर चिरी बाबू महारजन ने कहा कि जोशी का निधन नेपाल के लिए एक जीवित इतिहास की क्षति है। "वह हम सभी के लिए एकमात्र अभिभावक थे। उनके जीवन और योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।" काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक महारजन ने कहा कि यह अभी भी अनिश्चित है कि जोशी का अंतिम संस्कार कैसे होगा। महारजन ने बताया, परिवार, अस्पताल और अन्य लोगों से चर्चा की जा रही है। सभी लोग जल्द ही किसी ठोस नतीजे पर पहुंचेंगे।

शरीर को अनुसंधान के लिए अस्पताल को दान

शरीर को अनुसंधान के लिए अस्पताल को दान

जोशी के पुत्र ने बताया, पिता अपना शरीर अस्पताल को दान कर चुके हैं। हमें अभी इस पर चर्चा करनी है कि आगे कैसे बढ़ना है। बता दें कि पिछले साल, जोशी दंपती ने उनकी मृत्यु के बाद उनके शरीर को अनुसंधान के लिए अस्पताल को दान करने के लिए अस्पताल के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

निधन पर अस्पताल का बयान, नीचे पढ़ें---

कई बीमारियों से जूझ रहे थे शताब्दी पुरुष

कई बीमारियों से जूझ रहे थे शताब्दी पुरुष

अस्पताल सूत्रों के अनुसार शुक्रवार से जोशी की तबीयत बिगड़नी शुरू हुई थी। गुरुवार से उन्हें ऑक्सीजन दी जा रही थी और उनकी हृदय गति भी अस्थिर थी। जोशी यूरिन इन्फेक्शन और निमोनिया से भी पीड़ित थे। ब्लड टेस्ट से पता चला कि उन्हें डेंगू बुखार भी है। इससे पहले विगत 14 अप्रैल को सीने में दर्द और पेशाब करने में दिक्कत होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चार दिन अस्पताल में रहने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। जोशी लंबे समय से प्रोस्टेट और हृदय रोग से पीड़ित थे। इलाज के लिए उन्हें पहले भी कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

60 से अधिक पुस्तकों का लेखन

60 से अधिक पुस्तकों का लेखन

बता दें कि 1919 में पाटन में पैदा हुए जोशी ने साहित्य, इतिहास और संस्कृति के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान किया है। शताब्दी पुरुष के रूप में मशहूर जोशी की उपलब्धियों में संगीत, नाटक, संस्कृति और इतिहास जैसे विषयों पर 60 से अधिक पुस्तकों का लेखन शामिल है। जोशी को "सदी के साहित्यकार" की उपाधि से सम्मानित किए जाने के अलावा प्रतिष्ठित मदन पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

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