सट्टा बाजार में आया राजनीतिक ट्विस्ट, एनडीए का बोलवाला

पटना (मुकुंद सिंह)। बिहार विधानसभा चुनाव में पांचवें चरण के लिए मतदान अभी हुआ नहीं की सट्टा बाजार में राजनीतिक पार्टियों की हार और जीत की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सट्टा बाजार में भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए का बोलबाला है।

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पांचवें और आखिरी चरण मे एक तरफ महागठबंधन अल्पसंख्यक और दलित वोटों के जरिए एनडीए गठबंधन से आगे निकलने की कोशिश करेगा, तो दूसरी तरफ एनडीए सीमांचल क्षेत्रों में ओवैसी के जरिए, कोसी क्षेत्र में पप्पू यादव के जरिए और मिथिलांचल क्षेत्र में सवर्ण मतदाताओं के जरिए महागठबंधन पर बढ़त लेना चाहेगा। वहीं चौथे चरण ने एनडीए गठबंधन को वापसी को जोरदार मौका दिया है।

ऐसे में सट्टा बाजार निम्न बातें कह रहा है-

  • सट्टाबाजार ने एनडीए के लिए 125 से अधिक सीटों पर दांव खेला है, जिसमें 95-100 के बीच बीजेपी को अकेले दी हैं।
  • सट्टा बाजार के मुताबिक पांचवें चरण के बाद महागठबंधन को 110 सीटों से ज्यादा मिलने की उम्मीद नहीं है।
  • नीतीश कुमार की जनता दल(यू) को 55 और लालू की आरजेडी को 45 सीटें मिलने की बात कही जा रही है।
  • आरएसएस के सक्रिय हो जाने और बागी उम्मीदवारों के चलते महागठबंधन को नुकसान की आशंका है।

ऐसे सच हो सकती सट्टाबाजार की भविष्यवाणी

चौथे चरण के मतदान में 57.6 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। जो पिछले विधानसभा से 3.3 फीसदी ज्यादा हैं। यही नहीं एक बार फिर मतदान के दौरान महिला मतदाताओं में अधिक उत्साह दिखा और 60.4 फीसदी महिलाओं में मताधिकार का प्रयोग किया, जबकि 54.2 फीसदी पुरुषों ने वोट डाले। अगर सामाजिक समीकरण के नजर से देखने पर महागठबंधन की स्थिति एनडीए से मजबूत जरूर दिखाई देती है, लेकिन बीजेपी ने इस समीकरण को अपने पक्ष में करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। ऐसे में आगे आयीं महिलाएं और नये वोटर भाजपा को सत्ता सौंपने में बड़ा योगदान निभा सकते हैं।

दूसरा कारण नीतीश और लालू की नावी रणनीति में समानता न होना है। नीतीश कुमार के विकास के एजेंडे को भी लालू के साथ होने से झटका लगा है। ऊपर से आरएसएस ने अपनी सक्रियता से एनडीए को होने वाले नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की है।

वहीं बेहतर शिक्षा और रोजगार के नाम पर बीजेपी ने प्रवासियों को अपनी तरफ खींचने का प्रयास किया है जिसका असर भी देखा जा रहा है। तीसरे चरण के बाद संघ के कार्यकर्ताओं ने साइलेंट वर्कर की तरह बीजेपी के पक्ष में मत प्रतिशत बढ़ाने, मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक पंहुचाने और मतदातओं को लामबंद करने की तैयारियां शुरू कर दी थी।

यही नहीं इसी खास रणनीति के तहत ही पीएम नरेंद्र मोदी की रैली को चुनाव से ठीक पहले रखने का फैसला किया गया ताकि फ्लोटिंग वोट को किसी भी कीमत पर पार्टी के पक्ष में मोड़ा जा सके।गौरतलब हो कि बिहार में अब आखिरी चरण के 5 नवंबर को 57 सीटों पर मतदान होगा और जिसके बाद आठ नवंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे।

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