सरदार पटेल प्रधानमंत्री होते तो कश्मीर होता पाकिस्तान में
बैंगलुरु। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार बल्लभभाई पटेल को भारत को एक करने वाले नेता के रूप में राष्ट्रीय परिदृश्य में एक बार फिर से लाने की कोशिश की है। लेकिन वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नायर की आत्मकथा पर नजर डालें तो यह सरदार पटेल के बारे में कुछ और ही खुलासा करती है। कुलदीप नायर ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि सरदार पटेल कश्मीर को पाकिस्तान को देने के पक्ष में थे।

कुलदीप नैयर(89) ने महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, जिन्ना के जीवन को करीब से देखा है। उन्होंने लिखा है कि माउंटबेटन से मुलाकात के दौरान उन्होंने उन्हें बताया था कि सरदार पटेल कश्मीर को पाक को देने के पक्ष में थे। माउंटबेटन कहते हैं कि पाकिस्तान ने कश्मीर में लगातार सेना भेजकर स्थिति को बिगाड़ा था। उन्होंने कहा कि नेहरू का कश्मीर से पुराना नाता था जिसके चलते वह कश्मीर को पाक को देने के पक्ष में नहीं थे।
माउंटबेटन का कहना था कि अगर पाकिस्तान ने धीरज रखा होता तो कश्मीर उन्हें बिना किसी दिक्कत के अपने आप मिल गया होता। लेकिन पाकिस्तान ने जिस तरह बार-बार कश्मीर में सेना को भेजना शुरु कर दिया इससे मजबूर होकर राजा हरि सिंह को भारत की शरण में आना पड़ा। नायर लिखते हैं कि जब उन्होंने शेख अब्दुल्लाह को 1971 में जब साक्षात्कार किया था तो अब्दुल्ला ने कहा था कि सरदार पटेल ने उनसे कहा कि कश्मीर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र होने के नाते पाकिस्तान के साथ जाना चाहिए।
जब कश्मीर के राजा हरि सिंह ने भारत को मदद के लिए संपर्क किया तो भी पटेल ने कहा था कि हम कश्मीर के साथ मेल नहीं बढ़ायेंगे। लेकिन नेहरू पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के पक्ष में थे। लेकिन माउंटबेटन के कहने पर उन्होंने कश्मीर के भारत में विलय होने तक इंतजार करने को कहा था।












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