संजीव सिन्हा के कंधों पर बुलेट ट्रेन की अहम जिम्मेदारी, जानिए क्या है उनकी राय
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मुंबई। अहमदाबाद-मुंबई के बीच बनने वाली देश की पहली हाई स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना का अहम जिम्मा संजीव सिन्हा को दिया गया है। संजीव सिन्हा को इस प्रोजेक्ट का एडवाइजर बनाया गया है। संजय सिन्हा टोक्यो में टाटा के पूर्व एग्जेक्युटिव हैं। यही नहीं वह बाड़मेड़ राजस्थान से पहले आईआईटिएन भी हैं। आपको बता दें कि बुलेट परियोजना की नींव 14 सितंबर को रखी जाएगी, इसके निर्माण में तकरीबन एक लाख करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस परियोजना के प्रारंभ प्रधानमंत्री मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे की मौजूदगी में होगी।

2023 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट
एजवाइजर बनाए जाने पर सिन्हा ने कहा कि मैं दो सरकारों के बीच पुल का काम करुंगा, यह काफी प्रतिष्ठित लेकिन मुश्किल प्रोजेक्ट है, राजनीतिक मंशा को वास्तविकता में बदलना काफी मुश्किल होगा, इसके लिए काफी मेहनत करनी होगी। आपको बता दें कि भारत सरकार साबरमती, सूरत, वडोदरा सहित कुल 508 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट को मई 2023 तक जोड़ने की दिशा में काम कर रही है।

संजीव सिन्हा का अनुभव
सिन्हा ने बताया कि जापान की कंपनियों को अधिकतकर अपने ही देश में काम करने का अनुभव है, इसके अलावा जापान ने ताइवान बुलेट प्रोजेक्ट पर भी काम किया है। ऐसे में वह भारत में अनुभव को हासिल करना चाहते हैं। उनके सामने कई मुश्किल भी हैं जैसे अलग-अलग राज्यों के बीच आने वाली कानूनी अड़चन, भूमि अधिग्रहण, कर आदि की चुनौतियां होंगी। यही नहीं जापान के लोगों के लिए एक बड़ी मुश्किल अंग्रेजी बोलने वालों की भी होगी, कि कैसे अंग्रेजी बोलने वालों को काम पर लिया जाए, साथ ही सिविल इंजीनियरिंग की भी बड़ी चुनौती होगी। आपको बता दें कि सिन्हा का जन्म 1973 में राजस्थान में हुआ था और उन्होंने 1995 में कानपुर आईआईटी से फिजिक्स विषय से एमएससी की पढ़ाई की है। गोदरेज कंपनी में काम करने के बाद वह जापान की जेनटेक कंपनी के साथ काम करने के लिए चले गए, यहां पर उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभाली

कई कंपनियों के साथ हुआ है करार
बुलेट परियोजना का बड़ा हिस्सा जापान के निवेश से तैयार होगा। जापान भारत में बुलेट ट्रेन का निर्माण छह कंपनियों की मदद से करेगा, जिसमें जापान रेलवे ग्रुप, जापान इंटरनेशनल कंसल्टेंट भी शामिल होगी, साथ ही नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन व गुजरात, महाराष्ट्र राज्य सरकार की शहरी विकास मंत्रालय के बीच भी इस प्रोजेक्ट के लिए करार हुआ है। इस मेट्रो प्रोजेक्ट को भारत जापान के साथ मिलकर पूरा करेगा, दोनों ही देशों के बीच इस प्रोजेक्ट के लिए करार हुआ है, जिसके तहत जापान भारत को 88,000 करोड़ रुपए का लोन देगा, यह लोन महज 0.1 फीसदी की ब्याज दर पर दिया जाएगा। इस लोन का रीपेमेंट 15 वर्ष बाद शुरू होगा। भारत सरकार का कहना है कि इतना लंबा समय और कम ब्याज दर एक तरह से इस लोन को ब्याजमुक्त बनाता है।

जापान उठाएगा खर्च
भारत इस प्रोजेक्ट के लिए जो लोन प्राप्त कर रहा है वह तकरबीन शून्य ब्याज के बराबर है, जिसके चलते भारत की मौजूदा वित्तीय व्यवस्था पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं पड़ेगा, इस प्रोजेक्ट के लिए 80 फीसदी से अधिक व्यय का खर्च जापान सरकार उठा रही है। ऐसा इतिहास में पहली बार है जब किसी इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को किसी दूसरे देश ने इतनी ज्यादा सहूलियत के साथ करार किया हो। इस बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट के जिरए मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट का बड़ा मुकाम देने की कोशिश की जाएगी, दोनों सरकारों के बीच जो प्रोजेक्ट साइन किया गया है उसके अनुसार इसे मेक इन इंडिया और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत किया गया है। इसके प्रोजेक्ट के तत चार सब ग्रुप को बनया गया है जिसमे भारतीय उद्योग, जापानी उद्योग, डीआईपीपी, एनएचएसआरसीएल और जेट्रो के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो मेक इन इंडिया के लिए आवश्यक क्षमताओं की पहचान करने में मदद करेंगे।












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