मानसून सत्र: विपक्षी दलों को चेतावनी पत्र भेजेंगे किसान संगठन, संसद के बाहर होगा प्रदर्शन
नई दिल्ली, 12 जुलाई: नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को 7 महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है। कई बार किसानों की सरकार के साथ वार्ता भी हुई, लेकिन इस मसले का कोई हल नहीं निकला। अब 19 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, ऐसे में किसान संगठन चाहते हैं कि विपक्षी दल उनका साथ दें। साथ ही संसद में उनके मुद्दों को उठाएं। इसके लिए उनकी ओर से विपक्षी दलों को 17 जुलाई तक चेतावनी पत्र भेजा जाएगा।

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के मुताबिक वो राजनीतिक संगठन नहीं हैं, ऐसे में संसद में उनकी आवाज विपक्ष को उठानी चाहिए। इसके लिए उन्होंने विपक्षी दलों को चेतावनी पत्र भेजने का प्लान बनाया है। साथ ही उनकी मांगों को सदन में उठाने की मांग की। किसान नेताओं के मुताबिक 19 जुलाई से सत्र खत्म होने तक वो लोग संसद के बाहर प्रदर्शन करेंगे। इसमें हर संगठन के 5 सदस्य शामिल होंगे। ऐसे में कुल मिलाकर 200 के आसपास किसान रोजाना संसद के बाहर प्रदर्शन करेंगे।
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बिना शर्त बातचीत को तैयार?
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने हाल ही में कहा था कि सरकार ने जो प्रस्ताव भेजा है, उसमें कई शर्तें जुड़ी हैं। सरकार ने साफ किया है कि वो कानून वापस नहीं लेगी, सिर्फ बात करेगी। इस मामले में उनका पक्ष साफ है कि वो कानून वापसी के मुद्दे पर ही बातचीत करेंगे, बाकि उनकी कोई दूसरी शर्त नहीं है।
यूएन वाली बात पर यूटर्न
हाल ही में खबर आई थी कि टिकैत यूएन में इस मुद्दे को लेकर जाना चाहते हैं। जिस पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि हमने ये नहीं कहा था कि हम संयुक्त राष्ट्र में कृषि बिलों का मुद्दा उठाएंगे। हमने 26 जनवरी की घटना पर एक प्रश्न का उत्तर दिया था कि, क्या यहां ऐसी कोई एजेंसी है जो निष्पक्ष जांच कर सकती है? नहीं तो क्या हम इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाएं? उनके इसी बयान का गलत मतलब निकाला गया।












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