तीन तलाक बिल पर क्या बोले सपा सांसद आजम खान

समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान ने तीन तलाक बिल को लेकर बड़ा बयान दिया है।

नई दिल्ली। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से आजादी दिलाने वाला बिल शुक्रवार को लोकसभा में एक बार फिर पेश किया गया। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में बिल पेश करते हुए कहा कि इस कानून से मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बिल से महिलाओं को न्याय मिलेगा और उनका सशक्तिकरण होगा। हालांकि कांग्रेस समेत विपक्ष के कई दलों ने इस बिल का विरोध किया। वहीं, एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ट्रिपल तालाक बिल असंवैधानिक है और यह संविधान के अनुच्छेद 14-15 का उल्लंघन करता है। इस बीच समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान ने भी तीन तलाक बिल को लेकर बड़ा बयान दिया।

'मुसलमान के लिए कुरान से ऊपर कुछ भी नहीं'

'मुसलमान के लिए कुरान से ऊपर कुछ भी नहीं'

लोकसभा में तीन तलाक बिल पेश होने के बाद पत्रकारों ने जब यूपी की रामपुर लोकसभा सीट से सांसद आजम खान से उनकी पार्टी की राय पूछी तो उन्होंने कहा, 'इस मामले पर हमारा रुख स्पष्ट है। जो कुरान में लिखा है, हम केवल उसी का समर्थन करते हैं। किसी भी दूसरे धर्म ने महिलाओं को इस्लाम से ज्यादा अधिकार नहीं दिए हैं। 1500 साल पहले इस्लाम पहला ऐसा धर्म था, जिसने महिलाओं को समानता का अधिकार दिया था। आज इस्लाम धर्म में ही सबसे कम तलाक की दर और महिलाओं पर हिंसा के सबसे कम मामले आते हैं। इस्लाम में महिलाओं को जलाया या मारा नहीं जाता। तीन तलाक धर्म से जुड़ा हुआ एक मुद्दा है, नाकि कोई राजनीतिक मुद्दा और एक मुसलमान के लिए कुरान से ऊपर कुछ भी नहीं है। शादी को लेकर, तलाक को लेकर, हर चीज के लिए कुरान में स्पष्ट निर्देश हैं और हम इसका पालन करते हैं।'

'तीन तलाक इंसाफ का मुद्दा है'

'तीन तलाक इंसाफ का मुद्दा है'

गौरतलब है कि शुक्रवार को लोकसभा में तीन तलाक बिल पेश होने के बाद विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। तीन तलाक बिल पर कांग्रेस के विरोध को लेकर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह बहुत तकलीफ की बात है कि कांग्रेस ने ट्रिपल तलाक विधेयक पेश होने का विरोध किया। इससे पहले उन्होंने इसका विरोध नहीं किया था। पिछली बार वे लोकसभा से बाहर चले गए थे लेकिन आज उन्होंने ओवैसी का साथ दिया, जो इस बिल का विरोध कर रहे हैं। हमने हमेशा कहा है कि ट्रिपल तलाक ना तो धर्म का मुद्दा है, न ही प्रार्थना का और न ही किसी अन्य सांप्रदायिक विचार का। यह उस 'इंसाफ' का एक शुद्ध और सरल मुद्दा है जिसमें- महिला न्याय, महिला सम्मान और महिला सशक्तिकरण शामिल है। एक महिला नेता, सोनिया गांधी कांग्रेस पार्टी की नेता हैं, फिर भी कांग्रेस पार्टी लोकसभा में महिला विरोधी स्टैंड लेती है। यहां तक कि कांग्रेस विधेयक को भी पेश करने का विरोध करती है, मुझे कहना होगा कि यह ना केवल दर्दनाक है बल्कि बहुत ही अफसोसजनक है।'

'मोदी क्या कानून बना रहे हैं'

'मोदी क्या कानून बना रहे हैं'

वहीं, इस बिल का विरोध कर रहे एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'ट्रिपल तालाक बिल असंवैधानिक है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन है। हमारे पास पहले से ही घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, सीआरपीसी धारा 125, मुस्लिम महिला विवाह अधिनियम है। अगर ट्रिपल तालाक बिल एक कानून बनता है तो यह महिलाओं के खिलाफ और भी बड़ा अन्याय होगा। इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति गिरफ्तार होता है, तो वह जेल से भत्ता कैसे देगा? सरकार का कहना है कि अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति इस अपराध को करता है तो शादी बरकरार रहेगी और अगर उसे अदालत ने दोषी करार दिया तो उसे 3 साल की जेल होगी। वह 3 साल के लिए जेल जाएगा लेकिन शादी बरकरार रहेगी! मोदी क्या कानून बना रहे हैं? मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि यह किस तरह का न्याय है कि अगर किसी गैर-मुस्लिम आदमी पर ऐसा कानून लागू होता है तो वह 1 साल के लिए जेल जाता है और मुस्लिम व्यक्ति 3 साल के लिए जेल जाता है।'

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