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Sahara-Sebi Refund का पैसा सरकारी खजाने में गया तो निवेशकों को कैसे मिलेगा?

सहारा इंडिया के प्रमुख सुब्रत रॉय के निधन के बाद से सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट में पड़े निवेशकों के 25,000 रुपए से भी ज्यादा की रकम को लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं।

अब सरकार इसके कानूनी पहलुओं पर विचार कर रही है कि सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट में पड़ी जिस रकम का अबतक कोई दावेदार नहीं आया है, उसे किस तरह से भारत की संचित निधि ( Consolidated Fund of India) में ट्रांसफर किया जा सकता है।

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ज्यादातर निवेशकों का अबतक नहीं चला पता
सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट को स्थापित हुए एक दशक से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन अबतक अपना पैसा लेने आने वालों की तादाद बहुत ही कम रही है। इसके ज्यादातर निवेशकों का अबतक कुछ भी अता-पता नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में विशेष फंड में पैसे जमा करने का दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में ही भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के आदेश को बरकरार रखते हुए सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट और सहारा इंडिया हाउसिंग इंवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन को निर्देश दिया था कि वह कैपिटल मार्केट रेगुलेटर के पास निवेशकों के पैसे ब्याज समेत जमा करे।

सुप्रीम कोर्ट ने तभी कहा था, तो सरकार को ट्रांसफर हो जाए फंड
सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था, 'अगर, जमा की गई डिटेल के सत्यापन के बाद, (सेबी) सभी या किसी भी ग्राहक के बार में पता लगाने में असमर्थ है, तो ऐसे ग्राहकों से एकत्र की गई रकम भारत सरकार को आवंटित की जाएगी।'

बाद में आने वाले दावेदारों के लिए विकल्प की तलाश
तथ्य यह है कि एक दशक के बाद भी निवेशक अपनी रकम लेने के लिए नहीं आए हैं। इसलिए सरकार ऐसे इंतजाम का विकल्प ढूंढ़ रही है, जिससे बाद में अगर भूले-बिसरे निवेशक सामने आते भी हैं तो उनकी उचित रकम उन्हें लौटाई जा सके।

एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक संचित निधि में फंड ट्रांसफर करने के साथ ही निवेशकों को वापस करने के लिए अलग अकाउंट बनाने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'सेबी के तहत निश्चित रिफंड खाते में फैसले के 11 साल बाद भी दावेदार मुश्किल से ही आगे आ पाए हैं....'

जनकल्याण के लिए भी खर्च हो सकती है रकम
एक और अधिकारी के मुताबिक इस फंड का इस्तेमाल गरीब कल्याण या अन्य कल्याणकारी कार्य के लिए हो सकता है। साथ ही कानूनी प्रक्रिया के तहत भविष्य में निवेशकों को लौटाने की गुंजाइश भी छोड़ी जा सकती है।

25,163 करोड़ रुपए की मालिक अब सरकार?
इस साल 31 मार्च तक सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट में 25,163 करोड़ रुपए पड़े हुए थे। जबकि, पिछले 11 वर्षों में 48,326 खातों से जुड़े 17,526 आवेदनों के आधार पर सिर्फ 138 करोड़ रुपए का ही भुगतान हो पाया है।

इस साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद सहारा समूह की कोऑपरेटिव सोसाइटी के असली जमाकर्ताओं के वैध बकाया के भुगतान के लिए कोऑपरेटिव सोसाइटीज के सेंट्रल रजिस्ट्रार को 5,000 करोड़ रुपए दिए गए थे और रिफंड के लिए एक विशेष पोर्टल बनाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सहारा समूह के कोऑपरेटिव सोसाइटी के निवेशकों को आदेश के 9 महीने के भीतर इसी रकम से राशि लौटाई जानी है। इसके बाद इसमें जो रकम बच जाएगी, उसे फिर से सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाना है।

अदालत के आदेश से इस रिफंड प्रक्रिया पर अमल के लिए जुलाई में केंद्रीय गृह और कोऑपरेटिव मामलों के मंत्री अमित शाह ने सहारा के निवेशकों के लिए ही खास पोर्टल लॉन्च किया था।

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