तो सचिन तेंदुलकर के लिए विंबलडन, कॉमनवेल्थ गेम्स के आगे संसद का कोई महत्व नहीं
नई दिल्ली। सचिन तेंदुलकर जिन्हें बतौर क्रिकेटर देश में एक भगवान का दर्जा हासिल है। सचिन को अक्सर उनके इंटरव्यू में यह कहते हुए सुना गया है कि वह देश में खेलों का स्तर सुधारने के लिए काम करना चाहते हैं। खासबात यह है कि सचिन तेंदलकर हर प्रोडक्ट की लाचिंग पर मौजूद रहते हैं।
वह विंबलडन देखने के लिए लंदन तक पहुंच जाते हैं लेकिन उनके लिए शायद मुंबई से नई दिल्ली आना और संसद के सत्र में शामिल होना कोई अहमियत नहीं रखता है।
शायद सचिन की इसी ख्वाहिश की वजह से राज्यसभा सांसद बनाया गया था। नवंबर 2013 में जब सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट से संन्यास लिया तो लोगों को उम्मीद थी कि वह अब अपना समय देश की संसद को देंगे, लेकिन संसद तो सचिन की सूरत देखने को तरस गई है।
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की मानें तो पिछले वर्ष सचिन की उपस्थिति सिर्फ तीन प्रतिशत ही थी। जानिए अब वही सांसद जो कभी तेंदुलकर को संसद में देखकर खुश हो जाते थे, उनकी नामौजूदगी के बारे में सवाल करने लगे हैं।

सांसद पूछ रहे हैं सवाल
बुधवार को कुछ सांसदों ने संसद में सवाल उठाए कि आखिर सचिन तेंदुलकर हैं कहां हालांकि किसी भी सांसद ने उनका नाम लेने की हिम्मत नहीं दिखाई। समाजवादी पार्टी के सांसद ने कहा कि यह सांसद वाकई समाज में काफी बड़ा बदलाव ला सकते हैं लेकिन वह संसद ही नहीं आते हैं।

शुरू हुई आलोचना
अक्सर आलोचनाओं से बचे रहने वाले सचिन ने इस वर्ष संसद का एक भी सत्र अटेंड नहीं किया है और इस वजह से अब चारों ओर उनकी आलोचना शुरू हो गई है। सचिन को जून 2012 में राज्यसभा सांसद मनोनीत किया गया था।

वर्ष 2013 में सिर्फ तीन बार पहुंचे संसद
वर्ष 2013 में जहां सचिन ने सिर्फ तीन बार ही संसद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई तो वहीं इसी वर्ष उन्होंने एक बार भी बहस में हिस्सा नहीं लिया। सांसदों की संसद में उपस्थिति में सचिन का रिकॉर्ड सबसे बुरा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की मानें तो पिछले वर्ष सचिन की उपस्थिति सिर्फ तीन प्रतिशत ही थी।

विकास पर नहीं खर्च एक भी पैसा
रिकॉर्ड बताते हैं कि सचिन तेंदुलकर और रेखा दोनों ने एमपीलैड के जरिए उन्हें उनके पसंदीदा क्षेत्र के विकास के लिए मिलने वाली रकम का एक भी पैसा विकास पर खर्च नहीं किया है। एमपीलैड के तहत एक सांसद को एक वर्ष में पांच करोड़ रुपए मिलते हैं। सचिन ने वर्ष 2012 और वर्ष 2013 के दौरान उन्हें मिले 10 करोड़ रुपए में से एक भी राशि खर्च नहीं की है।

सचिन पर लगाया सांसदों ने आरोप
शरद पवार की एनसीपी से सांसद डीपी त्रिपाठी ने सचिन का नाम लिए बिना कहा कि ऐसे सांसद बहुत ही कम संसद में नजर आते हैं और यह साफतौर पर संसद का अपमान है। ऐसे लोगों को तो नामित ही नहीं करना चाहिए।

सचिन का खास चुनाव
200 टेस्ट और 15,921 रन बनाने वाले सचिन तेंदुलकर को जून 2012 में राज्यसभा के सांसद के तौर पर एक नया सम्मान दिया गया था। राज्यसभा जो कि संसद का अपर हाउस है, वहां पर 12 सीटें कला, विज्ञान, या फिर समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए आरक्षित होती हैं।

सांसदों की प्रेरणा बनने में असफल
सचिन तेंदुलकर को जिस समय यह पद दिया गया था लोगों को उम्मीद थी कि सचिन तेंदुलकर शायद उन सभी सांसदों के लिए नजीर के तौर पर सामने आएंगे तो संसद जाने से बचते हैं। लेकिन अफसोस सचिन सांसदों की प्रेरणा बन सकने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुए।

सचिन ने तोड़ा अपना वादा
राजीव शुक्ला ने एक इंग्लिश डेली के साथ बातचीत में एक्ट्रेस रेखा और सचिन की गैरमौजूदगी को काफी गंभीर मसला बताते हुए दोनों की जमकर आलोचना की थी। उन्होंने यह भी बताया कि जब सचिन ने उनकी बात हुई तो सचिन ने वादा किया था कि वह जरूर आएंगे। फिलहाल तो सचिन ने अपना वादा पूरा नहीं किया है।

मुंबई में मौजूद लेकिन दिल्ली आने में तकलीफ
27 जुलाई को सचिन तेंदुलकर बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन के साथ प्रो-कबड्डी का मैच देखने में व्यस्त रहे। सवाल है कि क्या उनके पास वाकई दिल्ली आने का समय नहीं था।

पहुंच गए राष्ट्रमंडल खेलों के लिए ग्लास्गो
सचिन तेंदुलकर जो कि यूनिसेफ के गुडविल एंबेसडर हैं, पिछले दिनों स्कॉटलैंड में मौजूद थे। यहां पर उन्होंने ग्लास्गो के सेल्टिक पार्क में कॉमनवेल्थ खेलों की ओपनिंग सेरेमनी के दौरान लोगों से बात की।












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