राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से हटने के बाद अशोक गहलोत और उनके समर्थकों ने मेरे खिलाफ गैंगबाजी शुरू कर दी: सचिन पायलट
नई दिल्ली। राजस्थान की राजनीति में इस वक्त सचिन पायलट मुख्य केंद्र बने हुए हैं। जिस तरह से उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोला है, उसके बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा है। पाार्टी ने उन्हें प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया। उपमुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद सचिन पायलट ने मुखर होकर अशोक गहलोत के खिलाफ अपनी असंतुष्टि को जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से मैं अपने स्वाभिमान को बचाने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन अशोक गहलोत और उनके विश्वासपात्र मेरे खिलाफ लगातार गुटबंदी कर रहे हैं। राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद गहलोत के लोगों ने मेरे खिलाफ गैंग बना लिया है।
Recommended Video

गैंगबाजी शुरू हो गई
सचिन पायलट ने कहा कि राहुल गांधी अब कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं हैं। पिछले वर्ष जब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया उसके बाद गहलोत जी और उनके दोस्तों ने एआईसीसी में मेरे खिलाफ गैंगबाजी शुरू कर दी। उसके बाद से ही मुझे अपने स्वाभिमान की रक्षा करना मुश्किल हो रहा था। बता दें कि मंगलवार को सचिन पायलट को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया, जिसके बाद पहली बार सचिन पायलट मीडिया के सामने आए और उन्होंने मीडिया को दिए इंटरव्यू में अपनी पीड़ा जाहिर की।

मेरी कोई मांग नहीं
अशोक गहलोत के साथ अपने मतभेद को लेकर सचिन पायलट ने कहा कि मैं उनसे नाराज नहीं हूं, मैं किसी भी तरह की सत्ता की मांग भी नहीं कर रहा हूं,मैं सिर्फ ये चाहता हूं कि कांग्रेस सरकार राजस्थान में अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए काम करे। हमने चुनाव प्रचार के दौरान जनता से जो वादे किए हैं, उसे सरकार पूरा करे। अशोक गहलोत मुझे और मेरे समर्थकों को सम्मान नहीं देते हैं और ना ही राजस्थान सरकार में काम करने का मौका देते हैं। प्रशानिक अधिकारियों से कहा गया है कि वह मेरे निर्देश का पालन नहीं करें, मुझे फाइलें नहीं भेजी जाती हैं, कई महीनों से कैबिनेट की बैठक और सीएलपी की बैठक नहीं हुई है। ऐसे में मेरा उस पद पर बने रहने का क्या मतलब अगर मैं जनता को दिए गए अपने वादों को पूरा नहीं कर सकता।

बातचीत की जगह नहीं बची
सचिन पायलट ने कहा कि मैंने इन मुद्दों को कई बार राजस्थान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में और वरिष्ठ नेताओं के सामने उठाया है। मैंने गहलोत जी से भी इन मुद्दों पर चर्चा की है, लेकिन जैसा कि मैंने कहा कि मंत्रियों और मंत्रिपरिषद की मुश्किल से ही कोई बैठक होती थी। बातचीत और बहस की कोई जगह ही नहीं छोड़ी गई।












Click it and Unblock the Notifications