Sabarimala Gold Row: सबरीमाला मंदिर से कैसे गायब हुआ 4.5 किलो सोना? केरल हाईकोर्ट सख्त
Sabarimala Temple Gold Missing: केरल के सबरीमाला अयप्पा मंदिर को आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु 41 दिन की कठिन व्रत और तपस्या के बाद यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्त यहां सोना, पैसा और चढ़ावे अर्पित करते हैं। भक्त ये दान इसलिए करते हैं ताकि उनका उपयोग भगवान की सेवा और यात्रियों की सुविधा में हो। लेकिन अब इसी मंदिर से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है जिसने लोगों की आस्था को झकझोर दिया है।
मंदिर की द्वारपालक मूर्तियों पर चढ़ाए गए सोने के कवर का वजन 2019 में प्लेटिंग के बाद करीब साढ़े चार किलो कम पाया गया। यह खुलासा होते ही भक्त हैरान हैं और अदालत ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए जांच के आदेश दिए हैं। सोने की रहस्यमय गुमशुदगी के बाद अब इस मंदिर का प्रबंधन विवादों में घिर गया है। इस चीज ने न केवल श्रद्धालुओं बल्कि अदालत तक को हैरान कर दिया है।

वजन में रहस्यमयी कमी
मामला मंदिर के प्रवेश द्वार पर मौजूद द्वारपालक मूर्तियों से जुड़ा है। इन पर सोने की परत चढ़ाई गई थी। साल 2019 में यह परतें मरम्मत और नई गोल्ड प्लेटिंग के लिए चेन्नई भेजी गईं। यह काम बेंगलुरु के भक्त उन्नीकृष्णन पोत्ति की ओर से अर्पण के रूप में कराया गया था।
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प्लेटिंग से पहले इन सोने से मढ़ी तांबे की परतों का वजन 42.8 किलो था, लेकिन जब इन्हें वापस लाया गया तो वजन घटकर 38.25 किलो रह गया। यानी करीब 4.5 किलो का फर्क सामने आया। यह बात देवस्वम बोर्ड की रिपोर्ट में दर्ज ही नहीं की गई, जिसे देख अदालत ने कड़ा रुख अपनाया।
हाईकोर्ट के तीखे सवाल
केरल हाईकोर्ट ने साफ कहा कि पेट्रोल या पानी का वजन कम होना समझ में आता है, लेकिन सोना तो उड़ नहीं सकता। आखिर 4.5 किलो सोना कहां गया? अदालत ने इस मामले में देवस्वम विजिलेंस को जांच का आदेश दिया है और तीन हफ्ते के भीतर रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि मंदिर की अन्य सोने से जुड़ी वस्तुओं की जांच हो और उन्हें मंदिर के स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जाए।
बिना अनुमति भेजा गया सोना
हाईकोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि इतनी अहम धरोहर को चेन्नई मरम्मत के लिए भेजा ही क्यों गया और वह भी अदालत की अनुमति के बिना। इससे पहले भी इस प्रोजेक्ट की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अदालत का मानना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी संपत्ति के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
कंपनियों की सफाई
इस पूरे मामले में भक्त उन्नीकृष्णन पोत्ति ने मीडिया से कहा कि कंपनी के पास वजन कम होने की वैज्ञानिक वजहें हो सकती हैं। लेकिन अदालत और भक्तों की नजर में यह तर्क कमजोर साबित हो रहा है। क्योंकि सोने जैसी धातु का इतना वजन कम होना सामान्य बात नहीं है।
भक्तों में गुस्सा और निराशा
यह खबर सामने आने के बाद भक्तों में गुस्सा और निराशा है। लोगों का कहना है कि वे सोना और पैसा मंदिर में भगवान की सेवा और तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए चढ़ाते हैं। ऐसे में अगर सोना गायब हो जाए या प्रबंधन इसे लेकर सही जानकारी न दे, तो श्रद्धालुओं का विश्वास कैसे बना रहेगा।
पहले भी उठे थे सवाल
यह पहली बार नहीं है जब सबरीमाला मंदिर के सोने से जुड़े प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े हुए हों। पहले भी इसकी लागत, काम की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन इस बार मामला गंभीर है क्योंकि इसमें सीधे-सीधे 4.5 किलो सोने के गायब होने का आरोप है।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
अब अदालत और जनता दोनों की नजरें त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड पर टिकी हैं। अदालत ने साफ कर दिया है कि जांच पूरी होने तक ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा गरम हो गया है। संघ परिवार से जुड़े संगठन इस मामले में राज्य सरकार और बोर्ड दोनों पर निशाना साध रहे हैं।
आस्था पर संकट की घड़ी
सबरीमाला मंदिर करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां एक-एक ग्राम चढ़ाया गया सोना श्रद्धालुओं की भक्ति और विश्वास का प्रतीक है। ऐसे में सोने की गुमशुदगी ने इस पवित्र स्थल की छवि पर दाग लगा दिया है। भक्त उम्मीद कर रहे हैं कि अदालत की सख्ती से सच सामने आएगा और मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
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