Sabarimala Case: धर्म के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं हो सकतीं: जस्टिस नागरत्ना, वो 7 सवाल जिन पर टिका है फैसला

Sabarimala SC Hearing Update: सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश और धार्मिक स्थलों पर भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं पर 10वें दिन की सुनवाई बुधवार, 29 अप्रैल को भी जारी रहेगी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 9 जजों की संवैधानिक पीठ इस मामले में धर्म, समानता और संवैधानिक नैतिकता (Constitutional Morality) के पेचीदा सवालों पर बहस कर रही है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की, जो भविष्य में धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन तय करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। क्या हैं वो 7 सवाल जिन पर अटका है फैसला...

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Justice BV Nagarathna Religious Remarks: धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक करना गलत: जस्टिस नागरत्ना

मंगलवार, 28 अप्रैल की सुनवाई के दौरान जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि धार्मिक प्रथाओं या आयोजनों के नाम पर सार्वजनिक रास्तों को बंद करना स्वीकार्य नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट फिलहाल उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है जिनमें महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश को लेकर कथित भेदभाव को चुनौती दी गई है।

राज्य को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने और रेगुलेट करने का पूरा अधिकार है। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि भले ही किसी समुदाय को अपनी पूजा पद्धति में स्वायत्तता प्राप्त है, लेकिन यदि उस क्रिया से सार्वजनिक व्यवस्था या धर्मनिरपेक्ष गतिविधियां प्रभावित होती हैं, तो सरकार को दखल देना होगा। अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक आयोजनों के दौरान सड़कों पर कब्जा और ट्रैफिक बाधित होने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं।

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Constitutional Morality vs Religious Freedom पर हिंदू धर्म आचार्य सभा ने क्या दी दलीलें

आचार्य सभा की ओर से पेश वकील अक्षय नागराजन ने दलील दी कि अनुच्छेद 25 केवल विश्वास (Belief) तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विश्वास की बाहरी अभिव्यक्ति जैसे अनुष्ठान, समारोह और परंपराएं भी शामिल हैं। उनका तर्क था कि सरकार अनुच्छेद 25(2)(a) का हवाला देकर धार्मिक संप्रदायों के अधिकारों में बेजा दखल नहीं दे सकती।

क्या हैं वो 7 सवाल: जिन पर टिका है भविष्य का फैसला

9 जजों की यह पीठ मुख्य रूप से 7 संवैधानिक सवालों पर चर्चा कर रही है, जो भविष्य में केवल सबरीमाला ही नहीं, बल्कि मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश और पारसी महिलाओं के अधिकारों जैसे कई मामलों को प्रभावित करेंगे:

मौलिक अधिकारों का टकराव: अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 25-26 (धार्मिक स्वतंत्रता) के बीच संतुलन कैसे बनेगा?

नैतिकता का दायरा: अनुच्छेद 25(1) में 'नैतिकता' का मतलब केवल धार्मिक नैतिकता है या 'संवैधानिक नैतिकता'?

अनिवार्य धार्मिक प्रथा (ERP): क्या कोर्ट यह तय कर सकता है कि कौन सी प्रथा धर्म का अनिवार्य हिस्सा है और कौन सी नहीं?

धार्मिक संप्रदाय के अधिकार: क्या अनुच्छेद 26 के तहत अधिकार अन्य मौलिक अधिकारों के अधीन हैं?

हिंदुओं का वर्ग (Class of Hindus): अनुच्छेद 25(2)(b) में 'हिंदुओं के वर्ग' की परिभाषा क्या है?

पूर्ण संरक्षण: क्या किसी संप्रदाय की 'अनिवार्य धार्मिक प्रथा' को अनुच्छेद 26 के तहत पूर्ण सुरक्षा प्राप्त है?

न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा: धर्म के आंतरिक मामलों में कोर्ट किस हद तक दखल दे सकता है?

सबरीमाला मामला केस में सुप्रीम कोर्ट में अब तक क्या हुआ?

7 अप्रैल से इस मामले में सुनवाई शुरू हुई। केंद्र सरकार ने महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ तर्क देते हुए कहा कि कई देवी मंदिरों में पुरुषों का प्रवेश भी वर्जित है, इसलिए परंपराओं का सम्मान होना चाहिए। 21-22 अप्रैल को SC कोर्ट ने टिप्पणी की कि धर्म से लाखों लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं, इसलिए किसी प्रथा को 'गलत' घोषित करना सबसे कठिन कार्यों में से एक है।

28-29 अप्रैल को जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस अमानुल्लाह ने 'अराजकता' के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि हर धार्मिक संस्थान को संवैधानिक मानदंडों के भीतर काम करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले और कानूनी अपडेट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।

क्यों अहम है सबरीमाला मामला?

केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर लंबे समय से विवाद रहा है। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी, लेकिन इसके बाद देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। अब संविधान पीठ इस मामले के व्यापक संवैधानिक पहलुओं पर विचार कर रही है, जिसका असर देश के अन्य धार्मिक स्थलों और परंपराओं पर भी पड़ सकता है। अदालत का अंतिम फैसला धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार के बीच भविष्य की संवैधानिक व्याख्या तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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