डीएम ने पत्नी से करवाया ऐसा काम कि पूरे जिले में हो रही तारीफ

मई में जब उनका तबादला बागेश्वर से रुद्रप्रयाग हुआ तो सैकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और उनके तबादले का विरोध किया।

नई दिल्ली। प्रशासनिक सेवा में बहुत कम ऑफिसर ऐसे होते हैं, जो अपने कामकाज को लेकर लोगों के बीच मिसाल बन जाते हैं। ऐसे ही एक ऑफिसर हैं उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल। डीएम मंगेश अपनी निस्वार्थ छवि और काम के प्रति गंभीर रवैये को लेकर लोगों के बीच खासे लोकप्रिय रहे हैं। डीएम मंगेश ने एक बार फिर अपनी ड्यूटी की सीमाओं से परे जाकर एक ऐसा काम किया है कि वो अखबारों की सुर्खियों में छा गए हैं।

निस्वार्थ छवि के लिए जाने जाते हैं डीएम मंगेश

निस्वार्थ छवि के लिए जाने जाते हैं डीएम मंगेश

दरअसल, डीएम मंगेश घिल्डियाल को जानकारी मिली कि रुद्रप्रयाग जिले के अंदर जीजीआईसी हाई स्कूल के विज्ञान विभाग में शिक्षक की कमी चल रही है और इसकी वजह से छात्र-छात्राओं को पढ़ाई में दिक्कत आ रही है। डीएम ने तुरंत अपनी पत्नी ऊषा घिल्डियाल को स्कूल के बारे में बताया और उनसे गुजारिश की, कि जब तक स्कूल को विज्ञान का शिक्षक नहीं मिल जाता, वो बच्चों को जाकर पढाएं।

पति की अच्छी सोच को पत्नी का साथ

पति की अच्छी सोच को पत्नी का साथ

डीएम मंगेश की पत्नी ऊषा ने आगे बढकर खुशी-खुशी ये जिम्मेदारी ली। ऊषा ने बहुत मेहनत से बच्चों को पढाया और कुछ ही दिनों में वो छात्र-छात्राओं की सबसे पसंदीदा शिक्षक बन गईं। गोविंद बल्लभ पंत यूनिवर्सिटी से प्लांट पैथोलॉजी में डॉक्टरेट ऊषा घिल्डियाल को शिक्षक के रूप में पाकर जहां बच्चे खुश हैं, वहीं रुद्रप्रयाग के लोग भी डीएम के इस कदम की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

ट्रांस्फर पर दुखी हुए थे लोग

ट्रांस्फर पर दुखी हुए थे लोग

डीएम मंगेश जनता के बीच यूंही लोकप्रिय नहीं हैं। सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं से उन्होंने लोगों को सीधे जोड़ा है। मंगेश जिले में सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं के लिए एक कोचिंग सेंटर शुरू करने की योजना भी बना रहे हैं। डीएम मंगेश की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसी साल मई में जब उनका तबादला बागेश्वर से रुद्रप्रयाग हुआ तो सैकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और उनके तबादले का विरोध किया।

IAS में हासिल की चौथी रैंक

IAS में हासिल की चौथी रैंक

मंगेश ने 2011 में आईएएस की परीक्षा पास करते हुए पूरे देश में चौथी रैंक हासिल की। उनके पास भारतीय विदेश सेवा में जाने का मौका था लेकिन उन्होंने अपने देश में रहकर ही आईएएस की नौकरी करने का फैसला लिया। मंगेश ने कुछ ही समय में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया। बागेश्वर में नियुक्ति के दौरान, उन्हें अपने जिले में जहां भी किसी समस्या का पता चलता, वो तुरंत मौके पर जाकर उसका समाधान करते। डीएम मंगेश के साथ उनकी पत्नी ऊषा भी जिले के विकास कार्यों में उनका सहयोग करती थीं। (फोटो साभार: फेसबुक/मंगेश घिल्डियाल)

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