गुजरात चुनाव से पहले दलितों का समर्थन हासिल करने का RSS का मेगा प्लान

गुजरात चुनाव से पहले दलितों को लुभाने के लिए आरएसएस शुरू करेगा मेगा अभियान, पीएम मोदी भी मौजूद रहेंगे समापन कार्यक्रम में

नई दिल्ली। गुजरात में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए आरएसएस ने अपनी गतिविधि को तेज करने का फैसला लिया है। आरएसएस के दलित संगठन ने चुनाव से पहले चार महीने का एक कार्यक्रम शुरु करने का फैसला लिया है, जोकि मुख्य रूप से गांव में लोगों के साथ संपर्क करने का अभियान चलाएगी। भारतीय बौद्ध संघ अध्यक्ष भांते संघप्रिय राहुल ने बताया कि हमारा उद्देश्य है कि गांवों में लोगों के संपर्क को फिर से स्थापित किया जाए, ताकि लोगों के बीच इस भ्रम को दूर किया जा सके कि भाजपा और आरएसएस दलित विरोधी है।

30 जून को शुरु होगी रथयात्रा

30 जून को शुरु होगी रथयात्रा

राहुल ने बताया कि गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी खुद इस दलित रथ यात्रा को 30 जून से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। गौर करने वाली बात है कि गुजरात के उना में दलित कांड के बाद भाजपा का यह बड़ा दलित अभियान है, जिसके जरिए पार्टी हर संभव कोशिश कर रही है कि वह एक बार फिर से दलितों के बीच अपनी छवि को बेहतर कर सके और आगामी चुनाव में पार्टी को दलित विरोधी छवि का सामना नहीं करना पड़े।

 आरएसएस-भाजपा की छवि को धूमिल किया जा रहा है

आरएसएस-भाजपा की छवि को धूमिल किया जा रहा है

पिछले कुछ समय से जिस तरह से भाजपा पर दलित विरोधी होने का आरोप लग रहा है उसपर राहुल का कहना है कि ऐसे कई लोग हैं जो नफरत फैलाते हैं और उन्हें भाजपा की राजनीति पसंद नहीं है, लिहाजा वह पार्टी व आरएसएस की छवि को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, ये लोग संघ और पार्टी पर गलत आरोप लगाते हैं कि हम दलितों पर अत्याचार करते हैं। उना कांड के बाद पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है, दलितों का भाजपा और संघ से बड़ा समर्थक कोई नहीं है। आपको बता दें कि राहुल ने यूपी चुनाव से पहले भी इस तरह का अभइयान चलाया था।

समापन कार्यक्रम में मौजूद होंगे पीएम मोदी

समापन कार्यक्रम में मौजूद होंगे पीएम मोदी

रथ यात्रा के बारे में राहुल ने बताया कि यह रथ यात्रा अक्टूबर माह में सोमनाथ मंदिर पर खत्म होगा, इस दौरान यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे, इसके अलावा जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे भी रहेंगे। राहुल ने कहा कि हम उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश करेंगे जो छूआछूत का सामना कर रहे हैं। हमने कुछ गांवों की एक लिस्ट तैयार की है जहां दलितों और सवर्णों के बीच ज्यादा दूरी है। हम सवर्ण नेताओं को भी इस कार्यक्रम में शामिल करेंगे ताकि सभी लोग एक साथ हो सके।

 राजनीतिक रथयात्रा नहीं है

राजनीतिक रथयात्रा नहीं है

रथ यात्रा के राजनीतिक उद्देश्य से साफ इनकार करते हुए राहुल ने कहा कि यह किसी भी तरह से राजनीति से प्रभावित नहीं है। हम इस तरह की रैलियां कई प्रदेशों में करा रहे हैं, जिसका उद्देश्य है कि लोगों को सही रास्ता दिखाना जो दलितों को नीची जाति का मानते हैं। हम लोगों को समझाने की कोशिश करेंगा ताकि वह ईसाई या मुस्लिम धर्म के प्रभाव में आकर इस तरह की सोच को आगे नहीं बढ़ाएं। राहुल ने बताया कि हिंदू और बौद्ध धर्म ऐसे धर्म हैं जिनका जन्म भारत में हुआ है और दलित इसमें से किसी भी धर्म का पालन कर सकते हैं।

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