जिंदा है इंसानियत: मैंने जिंदगी जी ली, इसके बच्चे अनाथ हो जाएंगे.. बुजुर्ग नारायण ने ये कहते हुए छोड़ा बेड
इंसानियत: मैंने जिंदगी जी ली, इसके बच्चे अनाथ हो जाएंगे.. बुजुर्ग नारायण ने ये कहते हुए छोड़ा बेड
नागपुर, अप्रैल 28: कोरोना महामारी में जब अपने ही अपनों का साथ नहीं दे रहे। ऐसे में नागपुर के एक बुजु्र्ग ने ऐसा काम किया जिसको सुनकर आप भी ये ही कहेंगे इंसानियत अभी जिंदा है। कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन, बेड मरीजों को नहीं मिल रहे हैं। वहीं नागपुर में 85 वर्षीय नारायण भाऊराव दाभाडकर ने ये कहते हुए अपना बेड छोड़ दिया कि मैंने अपनी पूरी जिंदगी जी ली है लेकिन इस महिला के पति के पीछे पूरा परिवार है इसके बच्चे अनाथ हो जाएंगे आप मेरा बेड इन्हें दे दीजिए और बीमार नारायण अपने घर चले गए और......

यह कहते हुए नागपुर के बुजुर्ग ने छोड़ा बेड, तीन दिन में हुई मौत
अस्तपाल में अपना बेड महिला के पति को देने के बाद आरएसएस स्वयंसेवक नारायण भाऊराव बीमारी की हालत में अपने घर चले गए। जबकि उनकी हालत काफी खराब थी और इसके तीन दिन बाद नारायण भाऊराव की मौत हो गई और अपने इस त्याग के कारण हमेशा के लिए अमर हो गए। सोशल मीडिया पर लाखों के संख्या में लोग नारायण राव के इस काम की जमकर तारीफ करते हुए श्रृद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। इंसानियत की मिसाल पेश करने वाले आरएसएस के स्वयंसेवक नारायण राव दाभाडकर की तारीफ मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी ट्विटर पर की और उनकी फोटो शेयर करते हुए दिवंगत आत्मा को श्रृद्धांजलि अर्पित की है।
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महिला का करुण पुकार सुनकर नारायण राव ने छोड़ दिया अपना बेड
बता दें नारायण भाऊराव दाभाडकर कुछ दिन पहले कोरोना की चपेट में आ गए थे उनका आक्सीजन लेवल घटकर 60 तक पहुंच गया था। जिसके बाद उनकी बेटी और दामाद उन्हें लेकर नागपुर के इंदिरा गांधी शासकीय अस्पताल में भर्ती करवाया। बहुत मसक्कत के बाद बुजुर्ग नारायण राव को अस्पताल में ये बेड मिला था। तभी अस्पताल में एक महिला रोती बिलकती अपने कोरोना संक्रमित 40 वर्षीय पति को लेकर पहुंची। वो महिला अपने पति को एडमिट करने के लिए अस्पताल प्रशासन के सामने गिड़गिड़ा रही थी। महिला की बेड के लिए रोना और करुण पुकार नारायण राव ने सुनी जिसे सुनकर उनका मन दुखी हो गया और उन्होंने अपना बेड महिला के पति को देने का आग्रह अस्पताल से किया।

अस्पताल प्रशासन ने नारायण राव से भरवाया स्वीकृति पत्र
मैं 85 वर्ष का हो चुका हूँ, जीवन देख लिया है, लेकिन अगर उस स्त्री का पति मर गया तो बच्चे अनाथ हो जायेंगे, इसलिए मेरा कर्तव्य है कि मैं उस व्यक्ति के प्राण बचाऊं।'' ऐसा कह कर कोरोना पीड़ित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक नारायण जी ने अपना बेड उस मरीज़ को दे दिया। नारायण राव से अस्पताल प्रशासन ने ये भी लिखाया कि वो मरीज के लिए स्वेच्छा से अपना बेड खाली कर रहे हैं। दाभाडकर ने अस्पताल प्रशासन के लिए स्वीकृत पत्र भरा और घर लौट आए और तीन दिन बाद दुनिया छोड़कर चले गए।
सोशल मीडिया पर नारायण राव की लोग दे रहे मिसाल
सोशल मीडिया पर हर कोई नारायण राव के इस त्याग की प्रशंसा कर रहा है और उन्हें मानवता की मिसाल बता रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुजुर्ग की तारीफ करते हुए लिखा, 'दूसरे व्यक्ति की प्राण रक्षा करते हुए श्री नारायण जी तीन दिनों में इस संसार से विदा हो गये। समाज और राष्ट्र के सच्चे सेवक ही ऐसा त्याग कर सकते हैं, आपके पवित्र सेवा भाव को प्रणाम!'












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