Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

नरेंद्र मोदी की रणनीति से परेशान हुआ संघ

Modi Rajnath
[नवीन निगम] संघ ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनवाया, यह सोचकर कि आजादी के बाद पहली बार संघ को अपने एजेंडे पर काम करने वाला व्यक्ति मिला, जिसकी सोच संघ की सोच से मेल खाती है। इसी बात को लेकर संघ ने भाजपा के कई शीर्ष नेताओं की नाराजगी की परवाह न करते हुए भी मोदी को आगे किया, लेकिन संघ के सूत्र बता रहे है कि संघ, मोदी के नए एजेंडे से कुछ परेशान होने लगा है।

दरअसल जब मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया तो मोदी ने संघ और भाजपा के नेताओं को समझाया कि कही उनके नाम के खिलाफ मुसलिम वोट एकजुट न हो जाए इसलिए वो अपनी रैलियों में मुसलिमों को लुभाने के लिए कुछ बातें कहते रहेंगे।

यहां तक सबकुछ ठीक था लेकिन जैसे जैसे समय बीत रहा है मोदी को असलियत समझ में आ रही है कि वह कितना भी अच्छा प्रदर्शन क्यों न करें वो एनडीए को 250 का आकड़ा नहीं पहुंचा पाएंगे। जब वह 200 के आसपास ही रह जाएंगे तो पार्टी दूसरे दलों को अपने साथ लाने के लिए उन्हें पीछे छोड़ देंगी। मोदी को जबसे इस बात का एहसास हुआ है वो मुसलिमों के हितों की बात के साथ चुनाव के बाद बनने वाले समीकरणों पर भी नजर रखने लगे है।

अब उनके भाषणों में हिदुत्व का वो पैनापन नहीं दिखाई पड़ रहा है जिसके लिए संघ ने उन्हें चुना था। पटना की रैली में उन्होंने इसीलिए हज को लेकर मुसलमानों को रिझाने की कोशिश की। जेपी का नाम लेकर उन्होंने नीतीश और सपा को घेरने की कोशिश की।

असल में मोदी अब इस एंजेडे पर लग गए है कि यदि भाजपा से कोई पीएम हो तो वह ही हो, अन्यथा कोई न हो। आगे जैसे-जैसे चुनाव पास आएंगे मोदी ममता, जयललिता, नवीन पटनायक, जगन, चंद्रबाबू नायडू, तेलंगाना के चंद्रशेखर राव, यहां तक की शरद पवार को भी मक्खन लगाने से पीछे नहीं हटेंगे।

भाषणों में हिदुत्व का वो पैनापन नहीं दिखाई पड़ रहा है

क्योंकि चुनाव बाद यही लोग एनडीए की सरकार बनवा सकते हैं और मोदी समझने लगे है यदि इन व्यक्तियों की रैलियों के दौरान थोड़ी बहुत तारीफ की जाती रहे थे, यह पार्टियां या नेता एनडीए की सरकार बनाने में उनके नाम के खिलाफ न चले जाए ऐसे में उनकी सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।

जबकि संघ और भाजपा ने मोदी को इसलिए आगे किया था कि एक बार हिदुत्व के नाम पर जितने वोट मिल सके मिल जाएं उसके बाद सरकार बनाने पर यदि नए सहयोगी मोदी पर सहमत नहीं होंगे तो भाजपा से कोई और नाम आगे बढ़ा दिया जाएगा और इस तरह मोदी का कद चुनाव बाद कम भी किया जा सकेगा, लेकिन मोदी, संघ और भाजपा की इस चाल को पहले ही समझ चुके हैं और वो आने वाले चुनाव के दौरान उन नेताओं को नाराज नहीं करेंगे जो बाद में उनके नाम पर सहमत हो सकते है।

उदाहरण के लिए वह बंगाल में जब भी रैली करेंगे ममता की तारीफ करेंगे, भले ही ममता उन्हें अपनी रैली में जमकर कोसे। संघ चाहता था कि मोदी की कट्टर हिंदू छवि का फायदा उठाते हुए वह बंगाल, आंध्र प्रदेश और उड़ीसा के मुसलिम बहुल इलाकों में अपनी पकड़ बनाए लेकिन जब मोदी इन इलाकों के क्षत्रपों की शान में कसीदे पढऩे लगेंगे तो भाजपा की इन इलाकों में नई उम्मीद जगना मुश्किल हो जाएंगी, खासतौर पर उड़ीसा और बंगाल में।

इन इलाकों में मोदी आक्रमक प्रचार करते तो निश्चित ही भाजपा को सफलता मिलती लेकिन बाद में नवीन पटनायक और ममता मोदी के नाम पर अड़ सकते है, इसी बात को ध्यान में रखते हुए मोदी इन दोनों नेताओं के खिलाफ उस तरह का आक्रमण नहीं करेगे जिसके लिए वह जाने जाते हैं। मोदी की इस नई रणनीति से संघ काफी विचलित हो सकता है, क्योंकि उसे आशा थी कि इन दो राज्यों में उग्र हिंदुत्व पनप सकता था।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+