'हमें किसी का धर्म नहीं बदलना, जीना सिखाना है, जो कोई भी इसमें खलल डालने की कोशिश करेगा...:मोहन भागवत
'हमें किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करना, बल्कि जीना सिखाना है, जो कोई भी इसमें खलल डालने की कोशिश करेगा....'
नई दिल्ली, 20 नवंबर: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि हमें किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करना है बल्कि जीना सिखाना है। हम पूरी दुनिया को ऐसा सबक देने के लिए भारत भूमि में पैदा हुए हैं। हमारा संप्रदाय किसी की पूजा प्रणाली को बदले बिना अच्छा इंसान बनाता है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने ये बात शुक्रवार को छत्तीसगढ़ में एक घोष शिविर में कही है।

'जो कोई भी धुन में खलल डालने की कोशिश करेगा, वह देश की लय में...'
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, जो कोई भी धुन में खलल डालने की कोशिश करेगा, वह देश की लय से तय हो जाएगा। भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए समन्वय के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, सत्य की हमेशा जीत होती है। झूठ हमेशा हारता है और भारत का धर्म सत्य है और सत्य ही धर्म है। भारत को हमेशा से ही विश्व गुरु के तौरा पर देखा जाता है, इसका कारण ये है कि कि प्राचीन काल में ही हमारे संतों ने सत्य को साध लिया था। इतिहास देखिए जब भी किसी राष्ट्र पर संकट आता था या भ्रम होता था तो वह रास्ता तलाशने के हमेशा भारत आते थे।

'इस देश को पाकिस्तान बनाने के मकसद से ...'
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख ने जुलाई में कहा था कि 1930 से भारत में मुस्लिम आबादी बढ़ाने के लिए एक संगठित प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि ये प्रयास "मुसलमानों का प्रभुत्व स्थापित करने और इस देश को पाकिस्तान बनाने" के मकसद से किए जा रहे थे।
मोहन भागवत ने कहा था, ''अपना प्रभुत्व स्थापित करने और इस देश को पाकिस्तान बनाने के उद्देश्य से 1930 से मुस्लिम आबादी को बढ़ाने के लिए एक संगठित प्रयास किया गया है। इसकी योजना पंजाब, सिंध, असम और बंगाल के लिए बनाई गई थी और यह कुछ हद तक सफल भी हुई।''

भागवत ने कहा था- भारतीयों का DNA समान है
इससे पहले मोहन भागवत ने यह भी कहा था कि सभी भारतीयों का डीएनए समान है और लोगों की पूजा करने के तरीके में अंतर नहीं किया जा सकता है। आरएसएस प्रमुख ने मुसलमानों से "भय के चक्र में नहीं फंसने" का भी अनुरोध किया था। उन्होंने कहा था कि भारत में इस्लाम खतरे में नहीं है। हिंदू-मुस्लिम एकता की अवधारणा भी भारत में भ्रामक है क्योंकि एकजुट होने के लिए कुछ भी नहीं है क्योंकि वे अलग नहीं हैं।

हिंदू-मुस्लिम संघर्ष का एकमात्र समाधान बातचीत है, कलह नहीं'
भागवत ने कहा, "हिंदू-मुस्लिम एकता भ्रामक है क्योंकि वे अलग नहीं हैं, भारत में सब एक हैं। अलग-अलग धर्म के बावजूद सभी भारतीयों का डीएनए समान है। हम एक लोकतंत्र में हैं। हिंदुओं या मुसलमानों का प्रभुत्व नहीं हो सकता है। केवल भारतीयों का प्रभुत्व हो सकता है। हिंदू-मुस्लिम संघर्ष का एकमात्र समाधान बातचीत है, कलह नहीं।''












Click it and Unblock the Notifications