एक व्यक्ति, संगठन या कोई विचारधारा देश को तोड़ नहीं सकती है: मोहन भागवत
RSS प्रमुख ने कहा कि समाज गुणवत्ता के आधार पर बनता है। कोई एक व्यक्ति, वर्ग या विचारधारा देश को तोड़ नहीं सकती है।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए कहा कि समाज गुणवत्ता के आधार पर काम करता है और समाज की गुणवत्ता के आधार पर ही महान देश का निर्माण होता है। कोई भी एक व्यक्ति, एक संगठन या एक विचारधारा किसी देश को बनाती या तोड़ती नहीं है। दुनिया में जो भी अच्छे देश हैं वहां पर हर तरह की विचारधार पाई जाती है। आपको उन देशों में अच्छे नेता भी मिलेंगे जिन देशों की स्थिति अच्छी नहीं है। इसका मतलब है कि यह सभी वजहें किसी भी देश के निर्माण में सहायक होती हैं।
मोहन भागवत ने कहा कि अच्छे देशों के पास हर तरह की विचारधारा होती है, हर तरह की व्यवस्थाएं होती है, इन्हीं व्यवस्थाओं के आधार पर ही कोई देश आगे बढ़ता है। नागपुर के पूर्व शाही घराने भोंसले परिवार का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि यह परिवार केशव बलिराम हेडगेवार के समय से ही संघ से जुड़ा था। छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर भागवत ने कहा कि उन्होंने स्वाराज्य की स्थापना की और दक्षिण भारत को अनेक तरह के अत्याचारों से मुक्त कराने में बड़ी भूमिका निभाई थी। वहीं भोंसले परिवार के शासन में उत्तर भारत को अत्याचारों से मुक्त कराया गया था।
बता दें कि इससे पहले मोहन भागवत ने कहा था कि भारत में विश्वगूरू बनने की क्षमता है। भारत को विश्व में खड़ा करना है, विश्व गुरू बनाना है, भारत की कुछ हैसियत बननी है तो भारत की प्राचीनता को स्थापित करना पड़ेगा। जनता तो श्रद्धा से मान लेगी, लेकिन विद्वानों को प्रमाण देने पड़ेंगे। नई पीढ़ि की पाठ्य पुस्तकों में इसके प्रमाण आने पड़ेंगे। राम सेतु है, ऐसा हम बताते थे तो लोगों को लगता था कि यह गप है, यह चित्र सही है, कितना पुराना है इसको लेकर विवाद शुरू हो गया। राम को अब नई पीढ़ि मानने लगी है।
भागवत ने कहा था कि लोगों की भलाई का काम, अपना स्वार्थ छोड़कर करने का काम, उसका रास्ता हमेशा कठिन होता है। उस रास्ते को बताने वाले महापुरुषों की तो मालिका है। दुनिया के किसी भी देश में सारे देश में मिलाकर जितने हुए उतने हमारे देश में पिछले 200 वर्ष में हुए हैं। भागवत ने कहा कि हम जयश्रीराम कहते हैं, लेकिन हमे जय श्री राम जैसा होने की कोशिश करना चाहिए। महापुरुषों के तेज में उजागर हुई राह पर चलने की हमे हिम्मत करनी चाहिए। ये ऐसे लोग होते हैं जो अपना काम करते हैं और बिल्कुल चुपचाप तरीके से करते हैं।












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