महात्मा गांधी की हत्या के पीछे था जवाहर लाल नेहरू का हाथ !

एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार महात्मा गांधी के आदर्शों पर देश से आगे बढ़ने का आह्वाहन कर रही है साथ कई योजनाओँ की शुरुआत कर रही है लेकिन दूसरी तरफ आरएसएस ने गांधी को लेकर विवादित लेख छाप डाला है। आरएसएस के मलयालय भाषा के मुखपत्र में यह विवादित लेख छपा है जिसमें कहा गया है कि नाथूराम गोडसे को गांधी को नहीं जवाहर लाल नेहरू को गोली मारनी चाहिए थी।

jawahar lal nehru

लेख में कहा गया है कि देश के विभाजन के लिए पंडित नेहरू जिम्मेदार थे, उनका महात्मा गांधी से कोई लगाव नहीं था। यही नहीं लेख में नेहरू को स्वार्थी बताते हुए कहा गया है कि महात्मा गांधी की हत्या सहित देश की सभी बड़ी आपदाओं के पीछे नेहरू का हाथ था। पत्र में कहा गया है कि यदि इतिहास के छात्रों को लगता है कि गांधी जी गोड़से का गलत निशाना बने हैं तो इसमें उनका दोष नहीं है। यह विवादित लेख आरएसएस के केसरी पत्रिका में बी गोपालकृष्णन ने लिखा है जो चालकुडी से भाजपा के लोकसभा उम्मीदवार थे।

अपनी सफाई में गोपालकृष्णन का कहना है कि उन्होंने यह लेख इसलिए लिखा है जिससे इतिहास के गलत तथ्यों को उजागर किया जा सके, उनका कहना है कि इतिहास में कुछ गलत तथ्य है जिसे अंग्रेजो ने लिखा है। उन्होंने कहा कि नेहरू को खुद को विश्व के नेता के रूप में देखना चाहते थे, वह अपने से उपर किसी को नहीं देखना चाहते थे। महात्मा गांधी की विश्व स्तर पर बढ़ती लोकप्रियता से नेहरू हमेशा से जलते थे। नेहरू कभी भी गांधीजी के शिष्य नहीं रहे बल्कि वो अंग्रेजों के लोकप्रिय थे।यही नहीं गोपालकृष्णन ने कहा कि वह सरकार से इतिहास को नये सिरे से लिखे जाने की मांग करेंगे जिससे कि गलत तथ्यों को उजागर किया जा सके।

अंग्रेजो ने इतिहास को इस तरह लिखा है जिससे नेहरू का महिमामंडन किया जा सके। लेख में कहा गया है कि नेहरू को 1942 से ही भारत के विभाजन के बारे में जानकारी थी लेकिन नेहरू ने गांधीजी को इस चर्चा से दूर रखा। नेहरू को आजादी के लिए सिर्फ गांधी जी की टोपी और खादी चाहिए थी। यही नहीं लेख में गोडसे को नेहरू से बेहतर बताया गया है। लेख में कहा गया है कि गोडसे ने गाधीजी के सीने पर गोली मारी थी जबकि नेहरू ने गांधीजी की पीठ में छुरा भोंका था।

लेख में कहा गया है कि गोडसे आरएसएस का सदस्य नहीं था बल्कि सावरकर के हिंदु महासभा का मानने वाला था। लेकिन गलत तरीके से गोडसे को आरएसएस का सदस्य बताया गया है। इस गलत तथ्य के जरिए नेहरू ने एक तीर से दो निशाने साधे थे। पहला यह कि सरदार पटेल का अपने से बड़ा नेता नहीं बनने दिया और दूसरा पटेल के जरिए ही आरएसएस पर प्रतिबंध भी लगवा दिया। यही नहीं नेहरू ने मृदुला सिन्हा जैसे नेताओं को खड़ा कर गांधी की हत्या से पहले ही पटेल का गृह मंत्री के पद से इस्तीफा मांगना शुरु कर दिया था।

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