एक देश, एक चुनाव पर आएगा कितना खर्च? विधि आयोग ने बताया 2034 तक का कैल्कुलेशन
नई दिल्ली। अगले लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराने के लिए 4500 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। विधि आयोग के मुताबिक ईवीएम और पेपर ट्रेल मशीनें खरीदने के लिए 4,500 करोड़ रुपये से अधिक की जरूरत होगी। विधि आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयोग के पास इस समय एक साथ चुनाव कराने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। चुनाव आयोग के पास 12.9 लाख मतपत्र इकाइयों, 9.4 लाख नियंत्रण इकाइयों और लगभग 12.3 लाख वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) की कमी है।

रिपोर्ट के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) जिसमें नियंत्रण इकाई (सीयू), एक मतपत्र इकाई (बीयू) और एक वीवीपैट शामिल भी है। इसकी लागत करीब 33,200 रुपये है। विधि आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, कि चुनाव आयोग ने बताया है कि आगामी चुनाव एक साथ कराए जाने से ईवीएम की खरीद पर लगभग 4,555 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
विधि आयोग ने कहा कि ईवीएम मशीन 15 साल तक काम कर सकती है। इस हिसाब से देखा जाए तो 2024 में दूसरी बार एक साथ चुनाव कराये जाने के लिए 1751.17 करोड़ रुपये और 2029 में तीसरी बार एक साथ चुनाव कराए जाने के लिए ईवीएम मशीनों की खरीद पर 2017.93 करोड़ रुपये की जरूरत होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2034 में प्रस्तावित एक साथ चुनाव में ईवीएम की खरीद के लिए 13,981.58 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाते हैं तो हर मतदान केंद्र के लिए अतिरिक्त ईवीएम और अतिरिक्त चुनाव सामग्री के अलावा कोई और अतिरिक्त खर्च शामिल नहीं होगा। ड्राफ्ट रिपोर्ट के मुताबिक, ईवीएम के मद्देनजर बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत भी हो सकती है।
रिपोर्ट में 2019 लोकसभा चुनाव के बारे में चुनाव आयोग ने बताया कि अगले आम चुनावों के लिए लगभग 10,60,000 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे।












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