दलित नहीं था रोहित वेमुला, राज खुल जाने के डर से की आत्महत्या? हैदराबाद पुलिस ने दी सभी आरोपियों को क्लीन चिट
26 वर्षीय रोहित वेमुला ने 17 जनवरी 2016 को हैदराबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी के होस्टल के एक कमरे में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी। रोहित की आत्महत्या का मामला लंबे समय तक सुर्खियों में रहा था। इस घटना के 8 साल से भी अधिक हो जाने के बाद पुलिस ने इस मामले में एक बड़ा खुलासा किया है।
हैदराबाद पुलिस ने शुक्रवार को तेलंगाना हाईकोर्ट में इस केस की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। इसमें बताया गया है कि रोहित वेमुला दलित नहीं था। रोहित वेमुला ने सुसाइड इसलिए किया क्योंकि उसे डर था कि उसकी असली जाति की पहचान सबको पता चल जाएगा।

प्रतिष्ठा धूमिल होने का डर!
पुलिस ने रिपोर्ट में बताया कि रोहित जानते थे कि वह दलित नहीं हैं। वह अपनी डिग्री खोने और पकड़े जाने के बाद कानूनी कार्रवाई से डर रहे थे। रोहित को इस बात की भी चिंता थी कि इस बात का पता उनके सहपाठियों को चलेगा तो उनकी प्रतिष्ठा धूमिल हो जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, रोहित के परिवार का जाति प्रमाणपत्र भी बिना किसी सबूत के बना था।
पुलिस ने कहा है कि वो रोहित की मां थी जिन्होंने उसे फर्जी अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवा के दिया था। रोहित को लगातार यह डर बना रहता था कि यदि उसका भेद खुला तो उसकी डिग्री खत्म हो जाएगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि, रोहित कई समस्याओं से जूझ रहे थे, वह सांसारिक जीवन से भी खुश नहीं थे। वह ज्यादातर समय राजनीतिक गतिविधियों को देते थे।
पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहित वेमुला वद्देरा जाति से ताल्लुक रखता था जो कि पिछड़ा वर्ग में आती है। पुलिस ने कहा कि वे रोहित वेमुला की जाति की असल पहचान के लिए जब उनकी मां राधिका से DNA टेस्ट को लेकर पूछा तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
अब तेलंगाना पुलिस इस रिपोर्ट को हाई कोर्ट में रख कर मामले को बंद करने की मांग करेगी। आपको बात दें कि है कि रोहित वेमुला हैदराबाद में पीएचडी का छात्र था। वह युनिवर्सिटी में आंबेडकर स्टूडेंट्स असोसिएशन के सदस्य भी था। आत्महत्या से पहले रोहित वेमुला ने एक पत्र छोड़ा था। इसमें उन्होंने लिखा था कि कोई भी उनकी मौत का जिम्मेदार नहीं है।
यह रिपोर्ट तेलंगाना में 13 मई को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान से ठीक 10 दिन पहले आई है। अब तेलंगाना पुलिस इस रिपोर्ट को हाई कोर्ट में रख कर मामले को बंद करने की मांग करेगी। आपको बात दें कि है कि रोहित वेमुला हैदराबाद में पीएचडी का छात्र था। वह युनिवर्सिटी में आंबेडकर स्टूडेंट्स असोसिएशन के सदस्य भी था। आत्महत्या से पहले रोहित वेमुला ने एक पत्र छोड़ा था।
रोहित की आत्महत्या के बाद उनके दोस्तों ने आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसे परेशान किया था। इस मामले को लेकर खूब राजनीति भी देखने को मिली थी। इसके बाद इस मामले में भाजपा सांसद बंडारू दत्तात्रेय के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई थी। रोहित की मृत्यु के समय स्मृति ईरानी मानव संसाधन विकास मंत्री थीं, कुछ समय बाद उन्हें भी पद से हटना पड़ा था। इसे रोहित वेमुला की मौत से जोड़कर देखा गया था।
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