रोहिंग्याओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर, कहा- ये शरणार्थी नहीं, आक्रमणकारी है
नई दिल्ली। रोहिंग्या मुस्लिम के बढ़ते संकट को लेकर भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने एक दिन पहले बांग्लादेश में कहा था कि इन शरणार्थियों के वापस पहुंचने पर ही हालात सामान्य होंगे। इस बीच भारत में भी रोहिंग्याओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिक दायर की है, जिसमें कहा गया है कि ये लोग शरणार्थी नहीं है, बल्कि आक्रमणकारी है। याचिका में कहा गया है कि भारत के अलग-अलग भागों में रह रहे 40,000 रोहिंग्याओं को वापस म्यांमार भेजा जाना चाहिए।

नवंबर में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ रोहिंग्या के निर्वासन पर इस नई याचिका पर सुनवाई कर सकती है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट पहले से ही भारत में रोहिंग्या मुस्लिम को लेकर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इन याचिकाओं में दो रोहिंग्या शरणार्थी मोहम्मद सलिमुल्लाह और मोहम्मद शाकिर की भी याचिका शामिल है, जिन्होंने सरकार को चुनौती दी है।
यह नई याचिका भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के किसान मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, विनय कुमार सिंह, तेलंगाना से बीजीपी विधायक टी राजा सिंह और एक्टिविस्ट सनील कुमार ने दायर कर रोहिंग्याओं को शरणार्थी होने से इनकार किया है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि रोहिंग्या अप्रवासियों को शरणार्थियों के रूप में नहीं बल्कि आक्रमणकारियों की तरह देखा जाना चाहिए।
जम्मू कश्मीर में रह रहे रोहिंग्याओं पर आपत्ति जताते हुए इस याचिका में तर्क दिया है कि ये लोग धारा 370 का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संविधान देश के लोगों को जम्मू कश्मीर में रहने की अनुमति नहीं देता है तो रोहिंग्या लोग कैसे वहां रह रहे हैं।
याचिका में रोहिंग्या के खिलाफ तर्क दिया गया, 'कोई भी विदेशी या ताकत यहां रहने के लिए हम पर दबाव नहीं डाल सकती। जिन लोगों को शरण नहीं मिली है, जिन्हें शरणार्थी नहीं माना गया है, लेकिन इन अप्रवासियों को अवैध रूप से शरण दी जा रही है। यह भारत की संप्रभुता के लिए शर्मनाक है।'
रोहिंग्या शरणार्थियों ने अपनी याचिका में कहा है कि म्यांमार में उनके समुदाय के साथ भेदभाव, अन्याय और अत्याचार हुआ है, इसी वजह से उन्हें भारत में शरण लेनी पड़ी थी।
भारत में रोहिंग्याओं के खिलाफ सरकार के अलावा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं और राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के नेताओं ने याचिका दायर कर कोर्ट को हस्तक्षेप करने को कहा है। वहीं, डेमोक्रेटिक युथ फेडरेशन और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ मार्क्सिस्ट के यूथ विंग ने सरकार के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की है।












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