लद्दाख में जिस सड़क से बौखलाया है चीन, उसे बना रहे हैं झारखंड के बेस्ट स्किल्ड लेबर
नई दिल्ली। झारखंड के स्किल्ड मजदूर अब सीमा पर चीन से करेंगे दो-दो हाथ। वे वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास न केवल सड़क बनाएंगे बल्कि चीन की धौंसपट्टी का जवाब भी देंगे। लद्दाख में जिस रोड के बनने से चीन बौखलाया हुआ है उसके निर्माण में झारखंड के विशेषज्ञ कामगारों का सबसे बड़ा योगदान है। सीमा सड़क संगठन के मुताबिक झारखंड के दुमका और देवघर जिले के लोग दुर्गम और ऊंचे पहाड़ों पर सड़क बनाने में सर्वश्रेष्ठ हैं। उनकी क्षमता, योग्यता और समपर्पण का कोई जवाब नहीं। पूरे भारत में उनका कोई मुकाबला नहीं है। लद्दाख सीमा पर चीन से उग्र तनाव के कारण भारत दारबुक श्योक –दौलतबेग ओल्डी रोड परियोजना को जल्द से जल्द पूरा कर लेना चाहता है। इस काम को अंजाम दे रहे थे झारखंड के स्किल्ड लेबर। लेकिन कोरोना संकट के कारण बहुत से मजदूर झारखंड लौट गये हैं। अब सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को इनकी कमी बहुत अखर रही है। ऐसे में बीआरओ के वरिष्ठ अधिकारियों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मदद की गुजारिश की है। हेमंत सोरेन ने मजदूरों की आर्थिक और शारिरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीमा सड़क संगठन से एक समझौता किया है। झारखंड भारत का पहला राज्य है जिसने सामरिक महत्व की सड़क बनाने के लिए मानव बल मुहैया कराने का समझौता किया है।

मजदूरों को 18 से 26 हजार के बीच महीना
सीमा सड़क संगठन में काम करने वाले मजदूरों को आमतौर पर हर महीने 10 हजार 800 रुपये का भुगतान किया जाता है। ऊंचाई और दुर्गम क्षेत्र होने पर मजदूरी बढ़ा कर देने का नियम है। 2016 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक फैसला दिया था कि बीआरओ में जो अस्थायी मजदूर 240 दिन काम कर चुके हैं उन्हें स्थायी कर दिया जाए और न्यूनतम वेतनमान दिया जाए। चूंकि ये मजदूर विपरित परिस्थितियों में बेहद कठिन काम करते हैं इसलिए वे विशेष सुविधाओं के हकदार हैं। हेमंत सोरेन से बातचीत के बाद बीआरओ, मजदूरों के मासिक भुगतान में 10 से 20 फीसदी बढ़ोतरी के लिए राजी हो गया है। 2 जून को झारखंड सरकार लेह में फंसे 60 मजदूरों को हवाई जहाज से रांची ले आयी थी। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया था कि ठेकेदार ने उनको कई महीनों तक पैसे नहीं दिये। इतना ही नहीं निर्धारित दर से कम भुगतान किया गया। इसके बाद हेमंत सोरेन ने ये मुद्दा बीआरओ के सामने उठाया। अब बीआरओ ने झारखंड सरकार को लिखित आश्वासन दिया है कि वह मजदूरों की भर्ती के बाद योग्यता और क्षमता के आधार पर 18 हजार से 26 हजार रुपये के बीच भुगतान करेगा। इसके अलावा चिकित्सा, परिवहन और दूसरी सुविधांएं भी मिलेंगी। बीआरओ झारखंड से 11 हजार 815 मजदूरों की भर्ती करेगा। इसके लिए मजदूरों के जिला उपायुक्त के कार्यालय में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। बीआरओ के अफसर दुमका पहुंच कर मजदूरों की भर्ती के लिए कागजी प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं।
Recommended Video

दारबुक श्योक- दौलत बेग ओल्डी रोड (डीएस-जीबीओ रोड)
दारबुक श्योग- दौलतबेग ओल्डी रोड पूर्वी लद्दाख में अवस्थित है। यह चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा के नजदीक है, इसलिए सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। इस सड़क का हर मौसम में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सड़क लद्दाख की राजधानी लेह के दक्षिणी छोर पर स्थित श्योक घाटी के दारबुक से दौलत बेग ओल्डी तक जाती है। दौलत बेग ओल्डी में भारत की दूरस्थ सैनिक चौकी है। यह 16 हजार फीट की उंचाई पर है और यहां से वास्तविक नियंत्र्ण रेखा 8 किलोमीटर दूर है। 255 किलोमीटर लंबी इस सड़क का कुछ काम बाकी है। सड़क के बीच से गुजरने वाली नदी पर एक पुल भी बनना है। श्योक नदी पर भारत पहले ही 1400 फीट लंबा रिनचेन ब्रीज बना चुका है। इस सड़क के बन जाने से भारत की पहुंच चीनी चौकियों के नजदीक हो जाएगी। इससे चीन तिलमिलाया हुआ है। वह इस सड़क निर्माण को रोकने के लिए तरह-तरह के हथकंड़े अपना रहा है। काम रोकने के लिए चीनी सैनिक 5 मई को भारतीय सीमा में घुस आये थे। झारखंड से जा रहे मजदूरों को चीनी धमकियों के बीच काम करना है।

यहां काम करना सबके बस की बात नहीं
दारबुक श्योक- दौलत बेग ओल्डी रोड के बचे हुए काम को जल्द पूरा करने के लिए ही सीमा सड़क संगठन ने झारखंड के मजदूरों को बुलाया है। सर्दियों में दौलत बेग ओल्डी का तापमान माइनस 55 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। यहां बर्फ और जमीन खिसकने की भी घटनाएं होती हैं। बड़े-बड़े चट्टानों को काट कर रास्ता बनाना पड़ता है। ऊंचाई पर सांस लेने के लिए अभ्यस्त होना पड़ता है। इन कठिन परिस्थितियों में काम करना सबके लिए संभव नहीं है। इसके लिए विशेष क्षमता और ट्रेनिंग की जरूरत होती है। झारखंड के श्रमिक इस काम में माहिर हैं। लद्दाख में दारबुक श्योक- दौलत बेग ओल्डी रोड के अलावा एक और सड़क बन रही है जो ससोमा से सेसर ला तक जाएगी। यह दौलत बेग ओल्डी (डीओबी) तक जाने का एक वैकल्पिक मार्ग है। यह सड़क डीओबी के दक्षिण पश्चिम में है। सीमा सड़क संगठन ही इन दोनों सड़कों का निर्माण कर रहा है। लद्दाख के अलावा झारखंड के विशेषज्ञ श्रमिक उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बोर्डर रोड प्रोजेक्ट में भी काम करेंगे।
-
Balen Shah Government: नेपाली गृह मंत्री के बयान ने उड़ा दी भारत की नींद, चीन को लेकर क्या कहा? -
Trump Vs China: अमेरिका पर भड़का चीन, ट्रंप को दी चेतावनी, कहा- 'कोई हमारे मामलों में दखल न दे' -
आशा ताई के सामने फफक पड़े मोहम्मद सिराज, जनाई भोसले को गले लगा खूब रोए, देश को रुला गया वीडियो -
Bihar New CM: सम्राट चौधरी के घर पहुंचे राज्यपाल के सचिव, 'कागज' लेकर राजभवन लौटे, तय हो गया नए CM का नाम? -
Gold Rate Today: सोना खरीदारों की मौज! हफ्ते के पहले ही दिन धड़ाम से गिरे दाम, चेक करें अपने शहर का नया रेट -
Tamil Nadu: धमकी से मुस्लिम महिला की सुरक्षा तक—हजीना सैयद के आरोपों से हिली कांग्रेस, चुनाव से पहले फोड़ा बम -
फोन इस्तेमाल करने पर राजस्थान रॉयल्स का अजीब जवाब, BCCI के नोटिस के बाद कहा- मैनेजर के फेफड़े खराब -
कौन हैं 24 साल के प्रफुल हिंगे? IPL डेब्यू मैच के पहले ओवर में झटके 3 विकेट, तोड़ दी राजस्थान रॉयल्स की कमर -
युवराज सिंह के शिष्य की दुखद मौत, 3 दिन के बाद मिली लाश, IPL में आने से पहले ही चली गई जान -
Hajj 2026: ईरान जंग के बीच सऊदी ने मक्का में बैन की एंट्री! हज से पहले सख्त हुए नियम, उमरा वीजा सस्पेंड -
IPL 2026: जयपुर में नहीं खेलेंगे रोहित-कोहली और धोनी, BCCI ने राजस्थान के फैंस को बनाया बेवकूफ -
MP CM Kisan Kalyan Yojana: 82 लाख किसानों को बड़ा तोहफा! 14-15 अप्रैल को खाते में आ सकती है किस्त












Click it and Unblock the Notifications