ऋषभ हत्याकांड: तीन दोषियों को अंतिम सांस तक उम्रकैद

मामले की दोबारा सुनवाई हुई। जिसमें तीनों को दोषी पाया गया। और अंतिम सांस तक जेल में कैद रहने की सजा मिली। न्यायाधिश ने तीनों दोषियों को दो-दो लाख का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड की राशि का 25 प्रतिशत पीड़ित परिवार को देने का ओदश दिया। घटना के दो अन्य आरोपी चंदन चौधरी एवं कृष्णा चौधरी फरार है। दिल्ली में पेशी के बाद लौटते समय टे्रन से कुदकर न्यायिक हिरासत से बक्सर के समीप चंदन भाग गया था। जबकि कृष्णा चौधरी को अबतक पुलिस नहीं पकड़ पाई है। छठा आरोपी घनश्याम चौधरी की जेल में ही मृत्यु हो चुकी है।
फैसले के पीछे कोर्ट का तर्क शुक्रवार को सजा सुनाने के पूर्व न्यायाधिश श्री सिंह ने वरीय अधिकवक्ता कुमुद सहाय के तर्कों को ध्यान पूर्वक सुना। अधिवक्ता ने 1973 के बाद सीआरपीसी एवं आईपीसी की धारा में हुए परिवर्तन एवं रेयर ऑफ द रेयरेस्ट के बारे में विस्तार से उल्लेख किया। इसके बाद न्यायाधिश ने माना की मासूम ऋषभराज हत्याकांड में पुलिस ने हत्यारों को बचाने का प्रयास किया है। पुलिस के कारण ही मामले की दोबारा सुनवाई करनी पड़ी।
न्यायाधिश ने हत्याकांड को रेयर ऑफ द रेयरेस्ट मानते हुए कहा-अंतिम सांस तक कैद की सजा से यदि कम दोषियों को सजा दी जाती है। तो मानवता की हार होगी। चार वर्षीय ऋषभ के हत्यारों के साथ नरमी नहीं बरती जा सकती। बच्चे को गायब कर हत्या कर देना मानवता की हत्या है।
माता-पिता ने संतोष जाहिर किया
बेटे के तीन हत्यारों को अंतिम सांस तक कैद की सजा मिलने के बाद ऋषभ की मां अर्चना एवं पिता दिलीप चौधरी ने कहा-न्यायालय पर उन्हें पूरा भरोसा है। फैसले से वे संतुष्ठ है। दंपति ने कहा-फरार दो दोषियों को सजा मिलने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी। न्यायाधिश द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद ऋषभ की मां कोर्ट परिसर में ही फफक-फफक कर रोने लगी। प्रशासन द्वारा सुरक्षा गार्ड वापस लिए जाने पर नराजगी जताते हुए दंपति ने कहा-वे लोग हमेशा दहशत में रहते हैं और उनके बच्चे की पढ़ाई ठप है।
छह बार सीएम दरबार का दरवाजा खटखटाया
थानेदार से लेकर डीजीपी तक गुहार लगाने के बाद ऋषभ के मां-बाप ने मुख्यमंत्री के जनता दरबार में छह बार अर्जी लेकर गए। आठ साल की कानूनी लड़ाई लडऩे के बाद शुक्रवार को मात्र तीन दोषियों को सजा मिलीं। दंपति का कहना है कि मुख्य दोषी कृष्णा चौधरी एवं चंदन चौधरी जबतक फांसी के फंदे पर नहीं चढज़ाते तब तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
जहांगीरी घंटा बजाने के बाद न्याय मिलना हुआ शुरू
आठ अगस्त 2006 को मैदापुर निवासी दिलीप कुमार चौधरी ने चार वर्षीय बेटे ऋषभराज की नृशंस हत्या कर दी गयी थी। दिलीप कुमार चौधरी ने मामले में राधेश्याम चौधरी, विनोद चौधरी, चंदन चौधरी व विश्वनाथ चौधरी के अलावा कृष्ण चौधरी व घनश्याम चौधरी को नामजद करते हुए बोचहां थाने में एफआईआर दर्ज करायी थी। घटना का कारण दिलीप व अभियुक्तों के परिवार के बीच विवाद बताया गया। एफआईआर के बाद भी
पुलिस ने कार्रवाई में शिथिलता बरती।
आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं किये जाने पर दिलीप चौधरी ने मुजफ्फरपुर के तत्कालीन डीआईजी अरविन्द के आवास पर लगे जहांगीरी घंटे को बजाया। अरविन्द पांडेय के आदेश पर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले के एक आरोपी घनश्याम चौधरी ने ब्लड कैंसर से पीडिम्त होने की स्थिति में एक साल पूर्व दम तोडम् दिया। कृष्ण चौधरी अब तक फरार है। उसके खिलाफ अलग मामला चल रहा है।
पसीने से तर-बतर व खौफजदा थे दोषी
फैसला सुनने के बाद विनोद चौधरी, राघेश्याम चौधरी व विश्वनाथ चौधरी के चेहरे पर पसीने से तर-बतर हो रहे थे, वहीं तीनों खौफ जदा दिख रहे थे। बाहर निकलते ही कैमरे का फ्लैस चमकने पर कुछ बुदबुदाते हुए बोल पड़े। आपलोग भी पीछे पड़े हैं। सुबह दस बजे से ही कोर्ट परिसर में काफी हलचल थी। फैसला सुनने के लिए सैकड़ों लोग एडीजे तीन के न्यायालय के सामने घंटों से जमा थे। ठीक 11:30 बजे सुनवाई शुरू हुई। 12 बजकर एक मीनट पर न्यायाधिश ने अपना फैसला सुना दिया और तीनों दोषियों को न्यायायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
एक दर्जन अधिवक्ता ने किया बहस
सरकारी पक्ष से लोक अभियोजक केदार नाथ सिंह, अपर लोक अभियोजक मोतीलाल साह, कृष्णदेव साह, गायत्री कुमारी ने सुनवाई में हिस्सा लिया। बचाव पक्ष से हाईकोर्ट के वकील नीरज कुमार, कुमुद सहाय, अंजु रानी, डां संगीता शाही, रमेश कुमार, उमाशंकर प्रसाद सिंह एवं उमेश कुमार सिंह ने केश में विचारण के दौरान हिस्सा लिया। कुल बारह गवाहों का बयान कोर्ट में दर्ज किया गया।
क्या था पूरा मामला
बोचहां थाना क्षेत्र के मैदापुर निवासी दिलीप कुमार चौधरी के चार साल के पुत्र ऋषभ राज की हत्या 8 अगस्त 2006 को कर दी गयी थी. बताया जाता है कि घटना के दिन ऋषभ दरवाजे पर खेल रहा था. आरोपित ने चाकलेट के बहाने ऋषभ को अपने घर बुला कर हत्या कर दी थी. पुलिस ने आरोपित के घर से ही ऋषभ का शव बरामद किया था. इस मामले में पुलिस ने राधेश्याम चौधरी, चंदन, विनोद व विश्वनाथ चौधरी को पकड़
कर जेल भेज दिया था. 2012 में फांसी की सजा सुनाने के बाद चंद चौधरी को जेल से कोर्ट के आदेश पर दिल्ली स्थित दूसरे मामले में पेशी के लिए भेजा गया था. लौटते वक्त चंदन पुलिस अभिरक्षा से बक्सर के पास ट्रेन से फरार हो गया था. घटना के बाद दिलीप को धमकी भी मिली थी, जिस पर उन्हें सुरक्षा मुहैया कराया गया था
घटनाक्रम
8 अगस्त 2006- बोचहां थाना के मैदापुर निवासी दिलीप चौधरी का चार वर्षीय पुत्र ऋषभ राज सुबह में लापता। शाम में पड़ोसी के घर के छज्जा पर शव मिला। छह लोगों पर प्राथमिकी दर्ज।
29 मार्च 2008- डीआईजी ने की मामले की समीक्षा की। आरोपियों को गिरफ्तार करने का दिया आदेश।
15 जुलाई 2008-दिल्ली पुलिस ने अवैध हथियार के साथ चंदन चौधरी एवं राधेश्याम चौधरी को गिरफ्तार किया। प्रोडक्शन वारंट पर मुजफ्फरपुर लाए गए।
13 अगस्त 2008- ऋषभ के माता-पिता ने डीआईजी के आवास पर लगे जहांगीरी घंटा को बजाया। एक सप्ताह बाद विश्वनाथ चौधरी गिरफ्तार।
16 नवम्बर 2012- पेशी के बाद दिल्ली से लौटते समय बक्सर के समीप चंदन चौधरी टे्रन से कुदकर फरार हो गया।
25 मई 2013- तत्कालीन एडीजे अरूण कुमार सिंह ने फैसला सुनाया। तीन को फांसी एवं एक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
31 मार्च 2014- जिला प्रशासन ने पीडित परिजन से अंगरक्षक वापस लिया। दहशत में जीने को मजबूर।
21 मई 2014- हाईकोर्ट के निर्देश पर सुनवाई पुरी करने के बाद एडीजे तीन रमाशंकर सिंह ने तीन आरोपियों को दोषी पाया।
23 मई 2014- न्यायाधिश ने तीन दोषियों को अंतिम सांस तक कैद जेल में कैद रहने एवं दो-दो लाख जुर्माने की सजा सुनाई।












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