2040 तक भारत में होंगे 12 करोड़ 30 लाख डायबिटीज के रोगी

नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली के चलते डायबिटीज से होने वाली मौतों में 2005 से 2015 के दौरान 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। डायबिटीज देश में वो 7वां रोग है जिसके कारण लोगों की सबसे ज्यादा मौत हो रही है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज की ओर से जारी किए गए डाटा के अनुसार 2005 में डायबिटीज से होने वाली मौतों में भारत 11वें स्थान पर है।

जारी किए गए डेटा के अनुसार 2015 में 3,46,000 लोगों की मौत डायबिटीज से हुई है। कुल हुई मौतों से 3.3 प्रतिशत मौत सिर्फ इसी वजह से हुई है। 1990 से अब तक इसकी वजह से हुई मौतों में 2.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

प्रति 1 लाख की आबादी पर 26 की मौत

प्रति 1 लाख की आबादी पर करीब 26 लोगों की मौत डायबिटीज से हुई है। चीन के बाद सबसे ज्यादा डायबिटीज के रोगी भारत में है। यहां करीब 6 करोड़ 90 लाख लोग डायबिटीज के शिकार हैं।

2015 में अंतरराष्ट्रीय मधुमेह फेडरेशन (आईडीएफ) की ओर से जारी किए गए डायबिटीज एटलस के मुताबिक डायबिटीज रोगियों की इन संख्या में से करीब 3 करोड़ 60 लाख लोग ऐसे हैं जो अभी भी इस रोग के निदान से दूर हैं।

इनमें से 9 प्रतिशत हैं जिनकी उम्र 20-79 साल के बीच है।

ये आंकड़े इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि यह दीर्घकालिक रोग है जो न सिर्फ पैंक्रियाज को इंशुलिन बनाने की क्षमता को कम करता है बल्कि यह पूरे शरीर पर प्रभाव डालता है।

डायबिटीज के कारण दिल के रोग, स्ट्रोक, किडनी फेल होना, आंखों की रोशनी जाना, नसों के डैमेज होने के कारण पैरों पर भी खतरा बढ़ सकता है।

49-59 तक की उम्र

इंडिया स्पेंड के मुताबिक जारी किए गए आंकड़ो में बताया गया है कि एक ओर जहां दूसरे देशों में डायबिटीज अधिकतर रोगी 60 साल की उम्र तक के होते हैं वहीं भारत में रोगी 49-59 उम्र तक के होते हैं इससे जनसंख्या की उत्पाकदता पर भी असर डालता है।

फोर्टिस सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर डायबिटीज के अध्यक्ष अनूप मिश्रा ने कहा कि डायबिटीज ने भारत में दुनिया से दशकों पहले अपने पांव जमा लिए थे।

उन्होंने बताया कि इस रोग के कारण उत्पादकता घटती है साथ ही काम करने वाली जनसंख्या में अनुपस्थिति-प्रवृत्ति बढ़ जाती है।

शहरी गरीब खर्च करते हैं करीब 10,000 रुपए प्रतिमाह

एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इंडिया की ओर से 2013 में प्रकाशित कराए गए एक अध्ययन के मुताबिक डायबिटीज पर शहरी इलाकों में लोग करीब 10,000 रुपए और गांवों में 6,260 रुपए हर माह खर्च करते हैं।

अध्ययन में पाया गया कि शहरी गरीब इस रोग पर 35 प्रतिशत और गांव के गरीब अपनी कुल आय का 27 प्रतिशत खर्च करते हैं।

इस बात की संभावना जताई जा रही है कि 2040 से पहले 12 करोड़ 30म लाख रोगी भारत में डायबिटीज से पीड़ित होंगे। यह अनुमान अंतरराष्ट्रीय मधुमेह फेडरेशन ने लगाया है।

( indiaspend.org / indiaspendhindi.com आंकड़ों आधारित, जन हितकारी और गैर लाभदायी संस्था है|)

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