Rhino hit by truck: तेज रफ्तार ट्रक ने मारी गेंडे को टक्कर, असम के CM ने ट्रक मालिक पर लगवाया जुर्माना
Rhino hit by truck असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रविवार को अपने ट्विटर हैंडल से एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में एक गेंडे और ट्रक की भीषण टक्कर दिख रही है। सीएम ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा है, "गैंडे हमारे खास दोस्त हैं, हम उनके स्थान पर किसी भी उल्लंघन की अनुमति नहीं देंगे। हल्दीबाड़ी की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में गैंडा बच तो गया, लेकिन ट्रक के ड्राइवर पर भारी जुर्माना लगाया गया। हम काजीरंगा में जानवरों को बचाने के अपने संकल्प के तहत 32 किलोमीटर के विशेष एलिवेटेड कॉरिडोर पर काम कर रहे हैं।"

गेंडे और ट्रक में हुई जोरदार टक्कर
हिमंता बिस्वा सरमा के द्वारा शेयर किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि एक गेंडा जंगल की ओर से निकलकर रोड पार करने की कोशिश करता है। इसी दौरान वो एक ट्रक से टकरा जाता है। हालांकि इस टक्कर में दोष ट्रक ड्राइवर का ही होता है, क्योंकि गेंडे को देखकर ट्रक ड्राइवर तेज रफ्तार में गाड़ी निकालने की कोशिश करता है। इसी कोशिश में ट्रक का पीछे का हिस्सा गेंडे के सिर से टकरा जाता है। इस टक्कर से गेंडा बुरी तरह से घायल भी हुआ है। वीडियो में उसे लड़खड़ाते हुए देखा जा सकता है।
Rhinos are our special friends; we’ll not allow any infringement on their space.
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) October 9, 2022
In this unfortunate incident at Haldibari the Rhino survived; vehicle intercepted & fined. Meanwhile in our resolve to save animals at Kaziranga we’re working on a special 32-km elevated corridor. pic.twitter.com/z2aOPKgHsx
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस ट्रक ने गेंडे को टक्कर मारी है वो जोरहाट से गुवाहाटी की ओर जा रहा था और घटना हल्दीबाड़ी एनिमल कॉरिडोर के पास हुई। टक्कर के बाद वाहन को कथित तौर पर नागांव जिले के बागरी इलाके में रोका गया और परिवहन के साथ-साथ वन विभाग के द्वारा भी भारी जुर्माना लगाया गया।
आपको बता दें कि पिछले महीने हिमंता बिस्वा सरमा और आध्यात्मिक नेता जगदीश वासुदेव जिन्हें सद्गुरु के नाम से जाना जाता है, ने सूर्यास्त के बाद काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व (केएनपीटीआर) के अंदर कथित तौर पर एक जीप सफारी करने के लिए आलोचना की थी। संरक्षणवादियों ने आरोप लगाया कि सफारी का समय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के उल्लंघन में था और इससे पार्क के अंदर खतरे वाले जानवर पैदा हो सकते थे।












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