बांग्लादेश में सुषमा स्वराज बोलीं- संयम से हल होगा रोहिंग्या मामला
नई दिल्ली। म्यांमार के रखीन राज्य में हिंसा पर भारत 'गंभीर रूप से चिंतित' है, जहां 'विस्थापित व्यक्तियों' की वापसी के साथ सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी। यह बात विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रोहिंग्या संकट के मद्देनजर कही। म्यांमार के रखीन राज्य में हिंसा से बचने के लिए लगभग 600,000 अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश में गए हैं, जहां सेना ने उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। म्यांमार एक जातीय समूह के रूप में रोहिंग्या को नहीं मानता और यह कहता है कि वे देश में अवैध रूप से बांग्लादेशी हैं। स्वराज ने चौथा संयुक्त सलाहकार आयोग के हिस्से के रूप में बांग्लादेशी पक्ष के साथ वार्ता के बाद कहा, 'म्यांमार के रखीन राज्य में हिंसा से भारत काफी चिंतित है।' हालांकि, उन्होंने 'रोहिंग्या' शब्द का इस्तेमाल न करने को कहा। स्वराज ने कहा कि इस मामले को संयम से संभाला जाना चाहिए। यह स्पष्ट है कि विस्थापित लोगों की वापसी के साथ ही स्थिति सामान्य हो सकेगी।

बता दें कि स्वराज,बांग्लादेश के विदेश मंत्री अब्दुल हसन महमूद अली के निमंत्रण पर दो दिवसीय यात्रा पर ढाका में हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि रोहिंग्या शरणार्थियों से देश की सुरक्षा को खतरा है, लिहाजा ये भारत में नहीं रह सकते हैं। सरकार ने इस बाबत खुफिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कुछ रोहिंग्या आतंकी संगठन के प्रभाव में हैं, लिहाजा वह भारत में किसी बड़ी साजिश को अंजाम दे सकते हैं, ऐसे में हमे दलीलों को भावनात्मक पहलू से नहीं बल्कि कानूनी नजर से देखना चाहिए।
कोर्ट ने साफ किया है कि इस मामले में कानून के अनुसार ही फैसला दिया जाएगा, जिमसे मानवता और कानून दोनों के आधार पर सुनवाई की जाएगी। केंद्र की ओर से कहा गया है कि देश में तकरीबन 40 हजार से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी हैं, इसकी वजह है कि म्यांमार में भड़की हिंसा। आपको बता दें कि म्यांमार में भड़की हिंसा की वजह से अबतक कुल 5 लाख से ज्यादा रोहिंग्या पलायन कर चुके हैं।












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