सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व वाली समिति मुंबई में अनधिकृत निर्माणों की जांच करेगी
मुंबई महानगरपालिका क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माणों की जाँच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया जाएगा, जैसा कि मंगलवार को विधान परिषद में राज्य उद्योग मंत्री उदय सामंत ने घोषणा की थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। यह मुद्दा मुंबई के विधायकों द्वारा उठाया गया था, जिससे स्थिति की गंभीरता पर प्रकाश पड़ा।

शिवसेना यूबीटी के एमएलसी सचिन आहिर ने बताया कि भूमि माफियाओं द्वारा सरकारी और निजी भूमि पर अतिक्रमण के कारण पूरे मुंबई में व्यापक अनधिकृत निर्माण हुए हैं। उन्होंने कहा कि निवासियों और जनप्रतिनिधियों ने बार-बार बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) से शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। आहिर ने नगर आयुक्तों, क्षेत्रीय उप आयुक्तों, नामित अधिकारियों, वार्ड अधिकारियों और कार्यकारी इंजीनियरों पर अवैध निर्माणों की अनदेखी करने का आरोप लगाया, जिनमें से कुछ ने कथित रूप से ऐसी गतिविधियों को सुविधाजनक बनाया।
जांच का आह्वान
आहिर ने विशेष जांच दल (एसआईटी) या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक समिति के माध्यम से जांच की मांग की। इसके जवाब में, सामंत ने आश्वासन दिया कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक समिति के माध्यम से जांच की जाएगी। मुद्दे की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश समिति का नेतृत्व करेंगे, जिसका विवरण जल्द ही साझा किया जाएगा। डी, ई, जी-साउथ, एच-वेस्ट, के-वेस्ट, पी-नॉर्थ, पी-साउथ और एल वार्ड सहित कई क्षेत्रों में सरकारी और निजी दोनों तरह की भूमि पर बड़े पैमाने पर अनधिकृत निर्माण देखा गया है।
बीएमसी अधिकारियों के खिलाफ आरोप
विपक्षी एमएलसी ने आरोप लगाया कि नगरपालिका ने इन अवैध संरचनाओं के खिलाफ केवल नोटिस जारी किए हैं, आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई है। आरोप लगाए गए हैं कि बीएमसी के कुछ भ्रष्ट अधिकारी इन निर्माणों को बचा रहे हैं। कांग्रेस के सदस्य भाई जगताप ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कई बीएमसी अधिकारी दस साल से अधिक समय से एक ही पद पर काम कर रहे हैं और सवाल किया कि अवैध निर्माण को ढकालने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य मंत्री मधुरी मिसाल ने स्वीकार किया कि अब तक किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सेना यूबीटी के अनिल परब ने आरोप लगाया कि भूमि माफियाओं द्वारा पी-साउथ और पी-नॉर्थ वार्डों में लगभग 150 एकड़ सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। उन्होंने इस तरह के अतिक्रमण को रोकने के लिए जिम्मेदार नामित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान किया।
वर्तमान स्थिति और कानूनी कार्यवाही
सामंत ने बताया कि वर्तमान में आठ वार्डों में 7,951 अनधिकृत निर्माण हैं, जिनमें से 1,211 को हटा दिया गया है। इसके अतिरिक्त, 2,015 निर्माणों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही चल रही है। उन्होंने दोहराया कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और इन चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।












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