योजना आयोग को नया रूप देने में जुटी भाजपा लेकिन कांग्रेस विरोध में

नई दिल्ली। जहां पीएम नरेन्द्र मोदी ने योजना आयोग के स्थान पर प्रभावशाली संस्था बनाने पर जोर दिया है वहीं कांग्रेस उनके इस कदम का पुरजोर विरोध कर रही है। रविवार को पीएम मोदी ने योजना आयोग के बारे में मुख्यमंत्रियों के साथ परामर्श बैठक की और उसके बाद कहा कि योजना आयोग की भूमिकाएं, प्रासंगिकता पर दो दशकों से बार-बार सवाल उठाए जाते रहे हैं।

पहली बार पुनरावलोकन 1992 में आर्थिक सुधारों के आरंभ पर किया गया था, जब यह महसूस किया गया कि सरकार की बदलती नीति के मद्देनजर अलग दृष्टिकोण की आवश्यकता है।"

योजना आयोग की भूमिकाएं, प्रासंगिकता पर उठे सवाल

उन्होंने कहा कि 2012 में संसदीय सलाहकार समिति ने कहा था कि योजना आयोग पर गंभीर रूप से पुनर्विचार करने और इसके स्थान पर नई संस्था बनाने की आवश्यकता है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी अपने कार्यकाल के आखिर में योजना आयोग पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया था इसलिए जब तक राज्यों को विकसित नहीं किया जाता, राष्ट्र को विकसित करना असंभव है। ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर तक बदलाव के लिए भी नीतिगत प्रक्रिया की योजना बनाने की जरूरत है।

जब तक राज्यों को विकसित नहीं किया जाता, राष्ट्र को विकसित करना असंभव

लेकिन कांग्रेस इस बात से सहमत नहीं है। केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित मुख्यमंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए कि 1950 से काम कर रहे योजना आयोग को केंद्र सरकार द्वारा एकतरफा खत्म किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके स्थान पर एक नई संस्था बनाने का प्रस्ताव अधकचरा, अनावश्यक है और देश के नियोजित विकास की जरूरत को नजरअंदाज करता है।

गौरतलब है कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने योजना आयोग की स्थापना की थी। इसकी स्थापना 15 मार्च, 1950 को की गई थी। इसके साथ ही पंचवर्षीय योजना का सिद्धांत सामने आया था।

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