तो भारत में शामिल होना चाहते हैं पीओके के मुसलमान
श्रीनगर। खुद को कश्मीरियों का खैर-ख्वाह बताने वाले पाकिस्तान और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख आतंकी हाफिज सईद के साथ ही कश्मीर में मौजूद हुर्रियत नेताओं को भी इस खबर को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए।

इस्लामिक सस्ंथा अंजुमन मिनहाज-ए-राउल की ओर से कहा गया है कि अगर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके में रहने वाले मुसलमानों को मौका दिया जाए तो वह भारत में शामिल होना चाहेंगे। यह वह संस्था है जो शांति और सौहार्द के लिए काम करती है।
99 प्रतिशत लोग भारत के लिए करेंगे वोट
संस्था के चेयरमैन मौलाना सैयद अतही देहलवी ने जम्मू में मीडिया से बात करते समय कहा कि पीओके में रहने वाले लोगों पर जनमत संग्रह कराया जाए तो 99 प्रतिशत लोग भारत में रहने के पक्ष में वोट करेंगे। देहलवी सितंबर माह में जम्मू कश्मीर में आई खतरनाक बाढ़ के बाद प्रभावित इलाकों का दौरा करने यहां पहुंचे थे।
अलगाववादी नेता खो रहे अपना वजूद
देहलवी ने यह भी कहा कि कश्मीर में अब हुर्रियत और अलगाववादी नेता अपना वजूद खो चुके हैं। घाटी में अब लोगों को विकास चाहिए और साथ ही वह बेहतर प्रशासन व्यवस्था की भी आस लगाने लगे हैं। उन्होंने कहा कि घाटी में अब लोग विकास और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था की बात करते हैं।
उन्हें शिक्षा और बेहतर जीवन स्तर चाहिए। ऐसे में वह अब सिर्फ कुछ मुट्ठी भर लोगों के बारे में जरा भी फिक्रमंद नहीं हैं।
मोदी और सेना के मुरीद
देहलवी पांच दिन के अपने दौरे के बाद भारतीय सेना के भी मुरीद नजर आए। उन्होंने कहा कि घाटी में भी लोग अब सेना की तारीफ कर रहे हैं। उनका कहना है कि सेना राहत और बचाव कार्यों में वाकई बहुत उम्दा काम किया है।
उन्हें अब इस बात का अहसास हो गया है कि सेना ही उनकी सबसे बड़ी रक्षक है। सिर्फ सेना ही नहीं देहलवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने इस दौरान कहा कि मोदी पूर देश में अपनी बेहतर नीतियों को लागू कर रहे हैं।
आईएसआईएस की आलोचना
देहलवी की मानें तो अंजुमन मिनहाज-ए-राउल सिर्फ अकेली ऐसी इस्लामिक संस्था है जो हमेशा से अल कायदा और दूसरे आतंकी संगठनों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करती आई है। उन्होंने कहा कि 90 के दशक में जब घाटी में रहने वाले कश्मीरी पंडितों को अपना घर और कश्मीर छोड़कर जाना पड़ा तो उन्होंने इसका विरोध किया।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से वह अलकायदा और ओसामा बिन लादेन की आलोचना के लिए आगे आए थे उसी तरह से वह अब आईएसआईएस की भी आलोचना करते हैं।












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