Republic Day 2022: पीएम मोदी के गणतंत्र दिवस की वेशभूषा के चुनावी मायने

नई दिल्ली, 26 जनवरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गणतंत्र दिवस की वेशभूषा चर्चा का विषय बन गया है। इसकी वजह यह है कि उन्होंने गणतंत्र दिवस समारोह में अपने पहनावे में उत्तराखंड और मणिपुर के खास वस्त्रों को जगह दी है। दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, लिहाजा उनके पहनावे को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। उत्तराखंड और मणिपुर समेत पांच राज्यों में 10 फरवरी से चुनाव शुरू हो रहे हैं। उत्तराखंड में 14 फरवरी को और मणिपुर में दो चरणों में 27 फरवरी और 3 मार्च को वोटिंग होनी है। नतीजे सभी राज्यों में एक साथ 10 मार्च को आएंगे। आइए जानते हैं कि पीएम मोदी की जिस वेशभूषा पर जो चर्चा हो रही है, उसका महत्त्व क्या है और इससे पहले पीएम मोदी इस वजह से कब-कब सुर्खियों में आए हैं।

पीएम मोदी की टोपी और गमछे पर चर्चा क्यों ?

पीएम मोदी की टोपी और गमछे पर चर्चा क्यों ?

26 जनवरी हो या 15 अगस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी विशेष वेशभूषा की वजह से हर बार कोई नई छाप छोड़ते रहे हैं। उनकी ड्रेस और लुक पर हमेशा चर्चा होती रही है। आलोचक खामियां निकालने की कोशिश करते हैं और समर्थक उनका संपूर्ण भारत के प्रति अपनत्व के रूप में बखान करते नहीं थकते। लेकिन पीएम मोदी को जो पसंद आता है, वह वही करते हैं। ना तो आलोचनाओं की चिंता करते हैं और ना ही सराहना मिलने से ही ज्यादा उत्साहित नजर आते हैं। लेकिन, 73वां गणतंत्र दिवस पर उनकी जो वेशभूषा रही है, उसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। क्योंकि, पीएम मोदी ने सिर पर जो टोपी लगाई है, उसका कनेक्शन उत्तराखंड से है और शॉल या स्टोल या गमछे का नाता सीधे उत्तरपूर्वी राज्य मणिपुर से जुड़ता है। तथ्य ये है कि दोनों ही राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं।

उत्तराखंड की टोपी और ब्रह्मकमल का महत्त्व

उत्तराखंड की टोपी और ब्रह्मकमल का महत्त्व

पीएम मोदी ने गणतंत्र दिवस के मौके पर जो खास वेशभूषा धारण की है, उसके बारे में और चर्चा करें उससे पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ट्वीट देख लते हैं। उन्होंने लिखा है, 'आज 73वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने ब्रह्मकमल से सुसज्जित देवभूमि उत्तराखण्ड की टोपी धारण कर हमारे राज्य की संस्कृति एवं परम्परा को गौरवान्वित किया है।' ब्रह्मकमल उत्तराखंड का राज्य पुष्प है और प्रधानमंत्री मोदी जब भी केदारनाथ धाम में पूजा-अर्चना करते हैं तो इस पवित्र फूल का उपयोग करना नहीं भूलते। उत्तराखंड के सीएम ने पीएम मोदी को इसके लिए राज्य की 1.25 करोड़ जनता की ओर से धन्यवाद भी दिया है।

गंगा स्नान के समय भी दिखा था मणिपुरी गमछा

गंगा स्नान के समय भी दिखा था मणिपुरी गमछा

इसी तरह मणिपुर का परंपरागत स्टोल या गमछा 'लीरम फी' भी प्रधानमंत्री मोदी के लिए नया नहीं है। वह पहले भी इसे पहनते रहे हैं। यह हाथ से बुना हुआ स्कार्फनुमा वस्त्र होता है, जो मणिपुर की मेतेई जनजाति की विशेषता है। इससे पहले हाल ही प्रधानमंत्री ने इसे तब धारण किया था, जब वे पिछले साल दिसंबर में पवित्र काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन करने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे थे। मां गंगा में पवित्र आस्था की डुबकी लगाते समय भी पीएम ने यह मणिपुरी गमछा अपने गर्दन पर रखा था और तब भी इसकी खूब चर्चाएं हुई थीं। पीएम मोदी के इस अंदाज को लेकर मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा था कि यह हमारे लिए बहुत ही गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि गंगा स्नान करते हुए प्रधानमंत्री ने इसका उपयोग किया इसे वह प्रदेश के लोगों के सम्मान के तौर पर देखते हैं। उस समय भी यह राजनीतिक चर्चा हुई थी कि क्या पीएम मोदी ने पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर ऐसा किया। हालांकि, सीएम बीरेन सिंह ने जवाब दिया था कि उत्तर पूर्व और मणिपुर के लिए पीएम के मन में काफी लगाव है और हर चीज को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए।

वैक्सीन लगवाते वक्त असम का गमछा

वैक्सीन लगवाते वक्त असम का गमछा

पिछले साल 1 मार्च की बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली स्थित एम्स में कोविड वैक्सीन की पहली डोज लगवाने पहुंचे थे। तब उन्होंने खुद वैक्सीन लगवाकर पूरे देश को इसके प्रति हिचकिचाहट दूर करने का संदेश दिया था, जो कि काफी कारगर रहा। लेकिन, उन्होंने उस दिन भी गर्दन पर एक गमछा लटका रखा था। वह गमछा असम का विशेष गमछा बताया गया और लोगों ने उसे असम विधानसभा चुनावों से जोड़ने की कोशिश की थी। क्योंकि, तब भी अप्रैल में पश्चिम बंगाल और असम समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले थे।

बंगाली भद्र मानुष वाली वेशभूषा!

बंगाली भद्र मानुष वाली वेशभूषा!

यही नहीं पिछले साल पीएम मोदी ने अपनी दाढ़ी का लुक और वेशभूषा को कुछ खास अंदाज में रखने की कोशिश की थी। उनके आलोचकों का कहना था कि वह बंगाली भद्र मानुष का गेटअप अपना रहे हैं, क्योंकि तब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। वैसे राजनीति को छोड़ दें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्थानीयता को हमेशा से तबज्जो देते रहे हैं। वह जहां भी जाते हैं, वहां की परंपरा को पूर्ण रूप से जीने की कोशिश करते हैं और करीब 135 करोड़ की आबादी का नेतृत्व करने की वजह से यह उनके व्यक्तित्व की विशिष्टता भी है।

2021 के गणतंत्र दिवस पर पहना 'हलारी पाग'

2021 के गणतंत्र दिवस पर पहना 'हलारी पाग'

वैसे स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर वे आम तौर पर साफा और पगड़ी पहनने के लिए ही चर्चित रहे हैं। पिछले साल 26 जनवरी को उन्होंने गहरे लाल रंग की पगड़ी पहनी थी, जो उन्हें गुजरात के जामनगर के शाही परिवार ने उपहार में भेंट किया था। इस पगड़ी को 'हलारी पाग' कहते हैं। उससे पहले के वर्षों में भी वे रंग-बिरंगे 'साफा' बांधते रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस पर उनके अलग-अलग 'साफे' तो उनकी खास स्टाइल बन चुकी है।

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