रिपोर्ट: 25 मार्च तक 400 के पार जा सकती है कोरोना के मरीजों की संख्या, अक्षांश देशों में महामारी का ज्यादा असर

नई दिल्ली। विश्व के कई देशों को अपनी चपेट में ले चुका कोरोना वायरस मानव सभ्यता के लिए खतरा बन गया है। अमेरिका, यूके, इटली और भारत सहित कई बड़े देश इस वायरस के प्रकोप का सामना कर रहे हैं। इटली में तो हालात इतने खराब है कि वहां संक्रमित लोगों की मौत का आंकड़ा चीन से भी ज्यादा हो गया है। हाल ही में की गई एक रिसर्च में भारत को लेकर चौंकाने वाला दावा किया गया है जो सरकार को बड़ी संकट में डाल सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले तीन दिनों में भारत में संक्रमित मामलों की संख्या 400 के पार भी जा सकती है।

चेन्नई के इंस्टीट्यूट में किया गया रिसर्च

चेन्नई के इंस्टीट्यूट में किया गया रिसर्च

पीटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक चेन्नई के प्रतिष्ठित संस्था सेंट्रम एटॉमिक एनर्जी डिपार्टमेंट के तहत स्वायत्त संगठन इंस्टीट्यूट आफ मैथमेटिकल साइंस (IMS) द्वारा किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि भारत में सक्रिय COVID-19 मामलों की संख्या बुधवार तक करीब 400 और स्थिति और खराब हुई तो 900 के करीब पहुंच सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह महामारी ज्यादातर अक्षांश देशों में ही अपना पैर पसार रही है।

भारत में बढ़ते मामलों पर ऐसे लगाई जा सकती है रोक

भारत में बढ़ते मामलों पर ऐसे लगाई जा सकती है रोक

सौम्या ईश्वरन और सीताभ्रा सिन्हा द्वारा किए गए अध्ययन में यह भी कहा गया है कि आने वाले दिनों में मरीजों की संख्या बढ़ेगी या घटेगी यह पूरी तरह व्यक्तिगत स्तर पर लोगों की प्रतिक्रिया जैसे कारकों और सरकार द्वारा चलाए जा रहे उपायों पर निर्भर करता है। भारत ने वायरस से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जनता कर्फ्यू की तारीफ विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कर चुका है। बता दें कि रविवार की सुबह तक देश में कोरोना वायरस के कुल मामलों के पुष्टी 324 की गई है, जिसमें पिछले दो दिनों में तेजी देखी गई थी।

भारत में मरीजों की कम दर से चौंकने की जरूरत नहीं

भारत में मरीजों की कम दर से चौंकने की जरूरत नहीं

सिन्हा का कहना है कि भारत में मरीजों की कम दर से चौंकने की जरूरत नहीं है। भारत में कोरोना वायरस का असर कम होना ही था क्योंकि अगर लैटिट्यूड के मुताबिक देखें तो दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावित देश 40 डिग्री अक्षांश पर हैं, और भारत इससे दूर है। इससे ऐसा लगता है कि जो देश इक्वेटर से जितना दूर होगा, उतना ही कोरोना से कम प्रभावित होगा। उन्होंने आगे बताया कि सामान्य तौर पर उच्च अक्षांशों के क्षेत्रों में महामारी की वृद्धि दर ज्यादा है उदाहरण के लिए डेनमार्क को ले सकते हैं।

लोगों द्वारा किया गया यह दावा पूरी तरह गलत

लोगों द्वारा किया गया यह दावा पूरी तरह गलत

सीताभ्रा सिन्हा बताते हैं कि अक्षांश का अध्ययन करने पर पता चला कि डेनमार्क के 56 डिग्री उत्तर और सिंगापुर के बीच भूमध्य रेखा और उच्च अक्षांश के देशों के बीच भिन्न होता है जो आमतौर पर वायरस के प्रसार की उच्च दर को दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में 11,000 से अधिक लोगों द्वारा दावा किया गया था कि वायरस के बढ़ने की वजह मौसम है लेकिन हमारे अध्ययन में इन दोनों के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि देशों के अक्षांशीय स्थिति और रोगजनकों के फैलाव की दर के बीच परस्पर संबंध को हम और अधिक गहराई से पढ़ रहे हैं।

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