संसद में शोर, कौन सुनेगा क्षेत्रिय दलों को

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) बीती 21 जुलाई से शुरू हुए संसद के मौजूदा मानसून सत्र के दो हफ्तों में लगभग कोई कामकाज नहीं हो पाया। पहला हफ्ता तो बिना किसी कामकाज के ही बीत गया, दूसरे हफ्ता भी तमाम तरह के हंगामों और झंझावातों में गुजरा।

सबसे बड़ी बात ये देखी गई कांग्रेस तथा भाजपा के बीच मतभेद के कारण क्षेत्रिय दल भी अपनी बात संसद में नहीं रख पा रहे हैं। टीएमसी,अखिल भारतीय द्रविड़ मुनेत्र कषगम जैसी पार्टियां अपना एजेंडा देश के सामने नहीं रख पा रही हैं।

एक कदम आगे

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन के संचालन में एक कदम आगे बढ़ाया। वे सभी दलों के नेताओं से मिलीं। इससे उम्मीद बनी थी कि सत्र के शेष अवधि का समय सकारात्मक होगा और संसद अपना निर्धारित काम काज समय पर पूरा कर सकेगी। पर ये नहीं हुआ।

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रात अभी बाकी है बात अभी बाकी की तर्ज पर कहा जा सकता है की मानसून सत्र से बहुत कुछ उम्मीद भी अभी बाकी हैं। बता दें कि संसद के दोनों सदनों में हंगामों के कारण अभी तक कोई काम नहीं हो सका है। कांग्रेस ने लोकसभा तथा राज्यसभा में तगड़ा हंगामा मचा कर रखा है।

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