नेताजी के वे संदेश जो प्‍लेन क्रैश के बाद हुए टेलीकास्‍ट

नई दिल्‍ली। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मौत का रहस्‍य गहराता ही जा रहा है। अभी तक बड़ा वर्ग मानता है कि ताइवान में हुए प्‍लेन क्रैश में नेताजी की मौत हो गई थी लेकिन अब जो नई जानकारी सामने आ रही है, उससे तो यही लगता है कि वर्ष 1945 के बाद भी नेताजी जिंदा थे।

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केंद्र सरकार की ओर से नेताजी की मौत से जुड़ी जिन फाइलों को सार्वजनिक किया जा रहा है उनमें नेताजी के वे संदेश मिले हैं जो उन्‍होंने अपने देश के नाम दिए थे। ये संदेश प्‍लेन क्रैश के बाद उन्‍होंने दिए थे।

नाम बदलकर हुआ नेताजी का अंतिम संस्कार

ये संदेश पीएमओ के पास मौजूद फाइल नंबर 870/11/p/16/92/ में दर्ज हैं। माना जाता है कि 18 अगस्‍त 1945 को ताइवान में हुए प्‍लेन क्रैश में उनकी मौत हो गई थी।

एक नजर डालिए कि ये संदेश कब के हैं और नेताजी ने इन छह संदेशों में क्‍या कहा था।

26 दिसंबर 1945

'मैं अभी विश्‍व शक्तियों की शरण में हूं। मेरा दिल मेरे देश भारत के लिए तड़प रहा है। मैं तीसरे विश्‍वयुद्ध के शिखर पर पहुंचने के दौरान भारत जाऊंगा। इसमें 10 वर्ष या उससे भी कम समय लग सकता है।

ब्रिटेन ने मान लिया था कि हो गई है नेताजी की मौत

एक जनवरी 1946

' हमें दो साल में स्‍वतंत्रता मिल जानी चाहिए। ब्रिटिश साम्राज्‍यवाद बिखरता जा रहा है। भारत को अहिंसा के रास्‍ते पर चलकर आजादी नहीं मिल सकती, लेकिन मैं महात्‍मा गांधी का सम्‍मान करता हूं।'

फरवरी 1946

'मैं सुभाष चंद्र बोस बोल रहा हूं, जय हिंद। जापान के समर्पण के बाद यह तीसरी बार है जब मैं अपनी भारतीय भाइयों, बहनों को संबोधित कर रहा हूं। इंग्लैंड के पीएम मिस्टर लॉरेंस और दो अन्य को परमानेंट सेटलमेंट के नाम पर भारत का खून चूसने के लिए भेज रहे हैं।'

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