तीन राज्यों में कांग्रेस की हार के साथ ही ओल्ड पेंशन स्कीम पर आई RBI की ये डराने वाली रिपोर्ट
Old pension scheme latest news: देश में लगातार बढ़ रही चुनावी गर्मी के बीच पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का मुद्दा भी गर्माया हुआ है। कांग्रेस लगातार पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग उठा रही है और जिन राज्यों में उसकी सरकार है, वहां उसे लागू करने की बात भी कह रही है।
लेकिन, इस बीच पुरानी पेंशन योजना को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक रिपोर्ट जारी की है और बताया है कि अगर इस योजना को लागू किया जाता है तो ना केवल आर्थिक दबाव बढ़ेगा, बल्कि प्रदेश के विकास पर भी बुरा असर पड़ेगा।

'राज्य वित्त: 2023-24 के बजट का एक अध्ययन' नाम से रिपोर्ट जारी करते हुए आरबीआई ने कहा, 'अगर राज्य ओपीएस पर वापस लौटते हैं तो ये एक बहुत बड़ा झटका होगा। पिछले सुधारों से जो फायदे मिले हैं, ओपीएस की वजह से उनपर भी असर पड़ेगा और आने वाली पीढ़ियों के हितों को नुकसान पहुंचेगा। कुछ राज्यों में ओपीएस लागू करने की रिपोर्ट मिल रही है, लेकिन इससे आर्थिक दबाव बढ़ेगा। साथ ही, विकास कार्यों के लिए जारी होने वाले फंड में भी कमी आएगी।'
क्या है ओपीएस?
आपको बता दें कि ओपीएस एक ऐसी योजना है, जिसके तहत रिटायरमेंट के बाद राज्य सरकार के कर्मचारियों को उनकी आखिरी सैलरी का 50 फीसदी हिस्सा पेंशन के तौर पर मिलता है। एलारा सिक्योरिटीज इंडिया ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद यहां फिर से नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) को लागू किया जाएगा, जबकि तेलंगाना में कांग्रेस पुरानी पेंशन योजना को लागू करेगी।
सभी राज्यों में लागू हुई ओपीएस तो क्या होगा?
आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, आंतरिक अनुमान बताते हैं कि अगर सभी राज्य सरकारें एनपीएस के स्थान पर ओपीएस को लागू करती हैं, तो राजकोष पर एनपीएस के मुकाबले 4.5 गुना ज्यादा भार पड़ेगा। साथ ही 2060 तक ये अतिरिक्त बोझ सालाना सकल घरेलू उत्पाद के 0.9 फीसदी के बराबर तक पहुंच सकता है।












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