RBI के डायरेक्टर ने मोदी सरकार के 20 लाख करोड़ के पैकेज पर उठाया बड़ा सवाल
नई दिल्ली। कोरोना वायरस की वजह से देश के करोड़ो गरीब, बेरोजगार, प्रवासी मजदूर मुश्किल का सामना कर रहे हैं। तमाम उद्योग धंधे बंद पड़े हैं, जिन्हें सरकार फिर से खोलने की कवायद कर रही है। इस बीच इन तमाम मुश्किलों को देखते हुए सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था। लेकिन सरकार के इस आर्थिक पैकेज पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष सहित समाज के अलग-अलग वर्ग के लोग इस आर्थिक पैकेज का ऐलान कर रहे हैं। लेकिन अब इस आर्थिक पैकेज के खिलाफ देश के सर्वोच्च बैंक रिजर्व बैंक के भीतर से भी आवाज उठने लगी है।

पैकेज पर खड़ा किया सवाल
रिजर्व बैंक के एक के एक डायरेक्टर सतीश काशीनाथ मराठे ने कोरोना से निपटने के लिए सरकार के पैकेज पर सवाल खड़ा किया है। उनका कहना है कि सरकार ने तीन महीने का मोरेटोरियम दिया है जोकि पर्याप्त नहीं है। यही नहीं सरकार को एनपीए में भी राहत देनी चाहिए थी और राहत पैकेज में इसे शामिल करना चाहिए था। अहम बात यह है कि काशीनाथ मराठे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से भी जुड़े हैं। उन्होंने इस बाबत एक ट्वीट किया है, जिसमे उन्होंने सरकार के राहत पैकेज पर सवाल खड़ा किया है।
ट्वीट कर कही ये बात
सतीश मराठे ने ट्वीट करके लिखा है कि यह राहत पैकेज काल्पनिक और आगे देखने वाला दोनों ही है, लेकिन फिर भी इसमे बैंक को शामिल नहीं किया गया है जोकि कोरोना संकट में फ्रंटलाइन वॉरियर के तौर पर काम कर रहे हैं। देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर करने के बैंक फ्रंटलाइन वॉरियर के तौर पर काम कर रहे हैं। तीन महीने का मोरेटोरियम पर्याप्त नहीं है। एनपीए में भी राहत दी जानी चाहिए थी। यही नहीं उन्होंने कहा कि यह पैकेज मांग के बढ़ाने में सफल नहीं होगा, यह मुख्य रूप से सप्लाई की पूर्ति पर केंद्रित है।
लंबे समय से हैं बैंकिंग सेक्टर में
गौरतलब है कि सतीश मराठे ने बैंक ऑफ इंडिया से अपने बैंकिंग करियर की शुरुआत की थी और वह 2002-06 तक युनाइटेड वेस्टर्न बैंक के चेयरमैन व सीईओ रह चुके हैं। इससे पहले 1991 में वह जनकल्याणकारी सहकारी बैंक लिमिटेड के सीईओ थे। यही नहीं वह सहकारी बैंक के क्षेत्र में काम करने वाली एनजीओ सहकार भारती के संस्थापक सदस्यों में से भी एक हैं।












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