'शीर्ष अदालत के खिलाफ आदेश पारित नहीं कर सकते', सुप्रीम कोर्ट की गुजरात हाईकोर्ट पर कड़ी टिप्पणी
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी अदालत का शीर्ष अदालत के फैसले के खिलाफ आदेश पारित करना संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है। पूरा मामला रेप पीड़िता की याचिका से जुड़ा था, जिसमें उसने गर्भपात कराने की इजाजत मांगी थी।
जिसके बाद गुजरात हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार कर दिया था, जबकि मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी।

सुप्रीम कोर्ट की यह कड़ी टिप्पणी शनिवार को हाईकोर्ट द्वारा आदेश पारित करने के बाद आई, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई आज होनी थी। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार कर दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसको गर्भपात कराने की इजाजत दे दी।
'यह संवैधानिक सिद्धातों के खिलाफ'
सोमवार (21 अगस्त) को सुनवाई के दौरान गुजरात हाई कोर्ट के फैसले का जिक्र हुआ, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीवी नागरत्न और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने आदेश की जानकारी मिलने के बाद कहा, "गुजरात उच्च न्यायालय में क्या हो रहा है? भारत में कोई भी अदालत उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ आदेश पारित नहीं कर सकती है। यह संवैधानिक सिद्धातों के खिलाफ है।"
गुजरात सरकार ने दिया जवाब
गुजरात सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शनिवार का आदेश केवल "लिपिकीय त्रुटि" को ठीक करने के लिए पारित किया गया था।
सरकार ने दी ये दलील
उन्होंने कहा, "पिछले आदेश में एक लिपिकीय त्रुटि थी और उसे शनिवार को ठीक कर दिया गया था। यह एक गलतफहमी थी।" उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के रूप में हम न्यायाधीश से आदेश को वापस लेने का अनुरोध करेंगे।
इससे पहले 19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए गुजरात हाई कोर्ट के रवैये पर चिंता जाहिर की थी और मेडिकल बोर्ड से ताजा रिपोर्ट मांगी थी। कोर्ट ने कहा था कि गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए काफी समय खर्च कर दिया।












Click it and Unblock the Notifications