दीपिका से शादी के लिए रणवीर को पीसनी पड़ी चक्की! क्यों कोंकणी रिवाजों से हुई शादी, जानें
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नई दिल्ली। दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह 14 नवंबर 2018 को सुबह 7 बजे इटली के लेक कोमो में कोंकणी रीति-रिवाजों के साथ शादी के बंधन में बंध गए। चूंकि, रणवीर सिंह सिंधी हैं तो अब दीपिका और रणवीर की एक बार शादी होगी, जिसमें सिंधी रीति-रिवाजों का पालन किया जाएगा। दीपिका और रणवीर सिंह के फैंस के लिए यह बड़ी ही खुशी का मौका है, लेकिन एक बात लोगों को समझ नहीं आ रही है कि दीपिका पादुकोण तो कर्नाटक से हैं। उनके पिता का जन्म भी कर्नाटक में ही हुआ तो उनकी शादी कोंकणी रीति-रिवाजों से क्यों हुई है? कोंकणी तो मुख्यत: गोवा में बोली जाती है। तो दीपिका पादुकोण का कोंकणी कनेक्शन आखिर है क्या?

सारस्वत ब्राह्मण हैं दीपिका पादुकोण
कोंकणी भाषा गोवा, महाराष्ट्र के दक्षिणी भाग, कर्नाटक के उत्तरी भाग और केरल के कुछ क्षेत्रों में बोली जाती है। कोंकणी भाषा मराठी के काफी करीब है। दीपिका पादुकोण के पिता प्रकाश पादुकोण का जन्म उत्तरी कर्नाटक के उडुपी जिले के पादकोण नामक स्थान पर हुआ। दीपिका पादुकोण का जन्म डेनमार्क के कोपेनहेगन में हुआ। दीपिका पादुकोण सारस्वत ब्राह्मण हैं और उनकी मातृभाष कोंकणी है। ये है कर्नाटक की दीपिका पादकोण का कोंकणी कनेक्शन।

कोंकणी रिवाज के तहत रणवीर सिंह ने पीसी होगी चक्की
कोंकणी रीति-रिवाजों के तहत उडिडा मुहूर्त का बड़ा महत्व होता है। काला चना जिसे स्थानीय भाषा में उडिदु कहते हैं, यह कोंकणी लोगों का प्रमुख आहार है। इसे शुभ अवसरों पर जरूर इस्तेमाल किया जाता है। इस रिवाज में दुल्हन को काला चना चक्की से पीसना सिखाते हैं। दूल्हा भी इस रस्म को करता है, ताकि वह पत्नी के बीमार होने पर उसकी मदद कर सके। ऐसे में रणवीर सिंह ने भी जरूर चक्की पीसी होगी।

काशी यात्रा भी करनी होती है
शादी के रीति रिवाजों में कई काम प्रतीकात्मक तौर पर करने होते हैं। कोंकणी शादी में भी एक ऐसा ही रिवाज है। इसका नाम है- काशी यात्रा। इस रस्म में दूल्हा प्रतीकात्मक तौर पर सभी सांसारिक सुखों को त्यागकर, एकांतवास के लिए काशी की ओर प्रस्थान करता है। इस बीच दुल्हन के पिता उसे रोक कर अनुरोध करते हैं कि वह वापस आकर उनकी बेटी से शादी करे। इसके बाद दूल्हा मान जाता है।












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