कांग्रेस पर भड़के सावरकर के पोते, उद्धव ठाकरे से की कार्रवाई की मांग

मुंबई। कांग्रेस सेवादल के कार्यक्रम में विनायक सावरकर से जुड़ी किताब बांटने के बाद विवाद शुरू हो गया है। अब इस मुद्दे पर खुद सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सेवा दल और राहुल गांधी समेत कई लोगों के खिलाफ वीर सावरकर का अपमान करने के लिए मुकदमा दर्ज होना चाहिए। कांग्रेस अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए समय-समय पर सावरकर का अपमान करती है। कांग्रेस एकदम निचले दर्जे की राजनीति कर रही है। यह आरोप निराधार है। इसके साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे को भी आड़े हाथ लिया।

उद्धव ने सावरकर के पोते को नहीं दिया मिलने का समय

उद्धव ने सावरकर के पोते को नहीं दिया मिलने का समय

रंजीत सावरकर ने महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा, मैं सीएम से मिलने आया था, मैंने मीटिंग के लिए कई अनुरोध भेजे थे लेकिन मैं आज भी उनसे नहीं मिल सका। उनके पास सावरकर जी के सम्मान के बारे में बात करने के लिए एक मिनट भी नहीं था। मैं बेहद निराश हूं। यह सावरकर जी का अपमान है। रंजीत सावरकर ने उद्धव ठाकरे से मांग करते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे ने लोकसभा चुनाव के प्रचार में कहा है कि अब कांग्रेस हद पार कर चुकी है इसलिए महाराष्ट्र में आईपीसी की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

'नाथूराम गोडसे कभी भी सावरकर के निकट लोगों में नहीं रहे'

रंजीत सावरकर ने कहा, नाथूराम गोडसे कभी भी सावरकर के निकट लोगों में नहीं रहे, वो हिन्दू महासभा के अध्यक्ष थे और गोडसे कार्यकर्ता। रंजीत सावरकर ने कहा की अटल जी की सरकार जब से आई तब से वीर सावरकर को लेकर हमला तेज हुआ है। आज के समय में एनआरसी को लेकर दंगो में किसका हाथ है यह सामने आ रहा है। ध्यान हटाने के लिए यह कांग्रेस का षड्यंत्र है और पब्लिसिटी के लिए कांग्रेस यह करती है।

शिवसेना को कांग्रेस के सामने आपत्ति दर्ज करानी चाहिए

शिवसेना को कांग्रेस के सामने आपत्ति दर्ज करानी चाहिए

सावरकर ने कहा कि मध्य प्रदेश में ऐसी किताबें कांग्रेस ही बांट रही है, उनकी ओर से लगातार इस तरह का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में शिवसेना को कांग्रेस के सामने आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। बता दें कि, मध्य प्रदेश के भोपाल में कांग्रेस के सेवादल की बैठक हुई। इस बैठक में विनायक सावरकर को लेकर एक किताब बांटी गई। इस किताब का शीर्षक था ‘वीर सावरकर, कितने वीर?' इसमें लिखे गए तथ्यों पर विवाद मचा हुआ है।

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