मैगी के 5 हजार करोड़ के बाजार पर रामदेव की नजरें
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला) नेस्ले की मैगी पर बैन से बाबा रामदेव खुश होंगे। वे तो चाहेंगे कि अब वे देश के 5 हजार करोड़ के मैगी बाजार को कब्जा लें। उनकी विभिन्न उत्पाद बनाने वाली कंपनी पतंजलि के भी अधिकारी खुश होंगे। खुश होने की बात ही है।
अब उनकी पतंजलि भी मैगी के बाजार पर कब्जा जमाने की फिराक है। उसे लगता है कि अब देश में नेस्ले की मैगी खाने वाले तो उसे खरीदेंगे नहीं इसलिए अब उनकी मैगी बाजार में छा सकती है।
अगर सच यह है तो मैगी के जाने पर आपको होगा अफसोस?
मैगी बाजार
दरअसल भारत में मैगी का बाजार बहुत बड़ा है। कहने वाले कहते हैं हर साल करीब 5 हजार करोड़ की मैगी को देश चट कर जाता है। अब नई परिस्थितियो में नेस्ले की मैगी से तो लोग तौबा करेंगे। इसलिए वे पतंजलि की मैगी को खाना पसंद कर सकते हैं। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनो में पतंजलि की तरफ से अपनी मैगी का प्रचार हो सकता है मीडिया के द्वारा।
सारे देश की पसंद मैगी
मार्केटिंग मामलों के जानकार अजय सोनी मानते हैं कि बाजार में बाबा रामदेव की मैगी को अपने लिए जगह बनाने का मौका मिल सकता है। दरअसल मैगी को तो सारा देश पसंद करता है। अब लोगों को उसके विकल्प की तुरंत तलाश है। जाहिर इन हालातों में रामदेव की कंपनी पंतजलि की मैगी बाजार में अपने लिए जगह बना सकती है।
मैगी का अपमान
इस बीच, सामयिक सवालों पर टिप्पणी करने वाले इलाहाबाद के चिंतक जाहिद खान कहते हैं कि मैगी के साथ हुआ अपमान नहीं सहेगा हिन्दुस्तान। भारत सदैव से पुरूष प्रधान देश रहा है यहाँ पुरूषों ने स्त्रियों के ऊपर अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए सदैव उनपर अत्याचार किया है । मैगी पर लगे बैन को इसी रूप में देखना होगा।
मैगी के साथ भी वही हुआ क्योंकि उसके नाम से ही उसके स्त्री होने का बोध होता है और मैगी पुरूष प्रधान समाज की किसी गहरी साजिश की शिकार हो गई। वे यह भी कहते हैं कि दुख इस बात का है कि मैगी ने कुछ नहीं किया ना ही किसी को बीमार किया ना ही किसी ने उसकी शिकायत की।













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