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रामदेव के बयान पर डॉक्टरों को कोर्ट की दो टूक,लोगों का इलाज करने की बजाए आप हमारा समय बर्बाद कर रहे हैं

नई दिल्ली, 04 जून। योग गुरू स्वामी रामदेव ने जिस तरह से हाल ही में एलोपैथिक डॉक्टरों को लेकर बयान दिया था उसके बाद वह विवादों में घिर गए थे। रामदेव के खिलाफ दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने केस दर्ज करा दिया था। इस मामले पर सुनवाई करते हुए डॉक्टरों की उस मांग को ठुकरा दिया है जिसमे उन्होंने रामदेव पर आपत्तिजनक सामग्री पब्लिश करने पर रोक लगाने की मांग की थी। कोर्ट में हुई बहस के दौरान कोर्ट ने सख्त लहजे में डीएमए से कहा कि आप लोगों को महामारी में लोगों का इलाज करने में समय लगाना चाहिए बजाए कोर्ट का समय बर्बाद करे।

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वहीं डीएम ने रामदेव के बयान को आहत करने वाला बताया। डॉक्टरों की ओर से कहा गया कि वह डॉक्टरों के नाम ले रहे हैं, इससे डीएमए के सदस्य आहत हो रहे हैं। वो कह रहे हैं कि विज्ञान फेक है। रामदेव फर्जी तरीके से कोरोनिल को कोविड की दवा बता रहे हैं और इससे मृत्यु दर शून्य बता रहे हैं। यहां तक कि सरकार ने भी उनसे कहा है कि इसका प्रचार नहीं करें। लेकिन इस बीच उहोंने 250 करोड़ की कोरोनिल बेच दी। लेकिन कोर्ट ने इसपर भी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कल को मुझे भी लग सकता है कि होमियोपैथी फेक है, यह एक राय है, ऐसे में आप इसके खिलाफ केस कैसे फाइल कर सकते हैं। अगर हम यह मान भी लेते हैं कि जो कहा गया वह गलत और भ्रमित करने वाला है तो भी इसमे केस दर्ज नहीं किया जा सकता है बल्कि पीआईएल फाइल की जानी चाहिए।

कोर्ट ने डॉक्टरों से कहा कि अगर पतंजलि नियमों का उल्लंघन कर रहा है तो यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह कार्रवाई करे, आप लोग क्यों ये सब कर रहे हैं। यह एक पीआईएल हो सकती है जिसे आपने केस बना दिया। बेहतर हो कि आप पीआईएल फाइल करें और कहे कि कोरोनिल को कोरोना का इलाज बताने के बाद इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला बताया गया और इस बीच लाखों लोगों ने इसे खरीद लिया। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि रामदेव को एलोपैथी में विश्वास नहीं है, उनका मानना है कि हर चीज का इलाज आयुर्वेद और योग से किया जा सकता है। वह सही भी हो सकते हैं और गलत भी, लेकिन कोर्ट ये नहीं कह सकती है कि कोरोनिल कारगर है या नहीं क्योंकि यह काम मेडिकल एक्सपर्ट का है। हालांकि उन्होंने विज्ञान को मूर्ख कहा है इस शब्द पर आपत्ति हो सकती है लेकिन केस दर्ज नहीं किया जा सकता है।

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