Ram Sethu Case in SC : सुब्रमण्यम स्वामी केंद्र को भेजेंगे पत्र, शीर्ष अदालत ने दी अनुमति
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता सुब्रमण्यम स्वामी राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी को अनुमति दी है कि वे केंद्र सरकार के पास पत्र लिखें।

Ram Sethu Case in SC : सुब्रमण्यम स्वामी ने राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की लड़ाई देश की सबसे बड़ी अदालत में लड़ रहे हैं। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी को कहा है कि वे केंद्र सरकार के पास पत्र भेज सकते हैं। गुरुवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत में कहा कि इस संबंध में निर्णय लेने की प्रक्रिया संस्कृति मंत्रालय में चल रही है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता अगर कुछ और तथ्य या दस्तावेज देना चाहते हैं तो सरकार को पत्र (Representation) लिख सकते हैं।
राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग
इस मामले में सुब्रमण्यम स्वामी ने अदालत से कहा कि यह मुद्दा भाजपा के घोषणापत्र का हिस्सा है। पार्टी 'उल्लंघन' कर रही है। इस पर मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्वामी को संस्कृति मंत्रालय के साथ अतिरिक्त सामग्री शेयर करने की अनुमति दी। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने राम सेतु को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने संबंधी स्वामी की याचिका का निस्तारण कर दिया।
अदालत से संपर्क कर सकेंगे स्वामी
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पार्डीवाला भी शामिल रहे। पीठ ने सरकार से कहा कि जो भी फैसले लिए गए हैं, उसके संबंध में स्वामी को बताया जाए। पीठ ने स्वामी को कानूनी सहारा लेने की अनुमति भी दी। इसमें शिकायतें कम होने पर फिर से अदालत का संपर्क करना भी शामिल है।
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फरवरी तक देना था जवाब
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते एक सुनवाई में अदालत ने सरकार को स्वामी की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए फरवरी के पहले सप्ताह तक का समय दिया था। स्वामी ने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले साल दिसंबर तक जवाब दाखिल करने का वादा पूरा नहीं किया गया।
सरकार कब देगी जवाब
इस पर अदालत ने तब सॉलिसिटर जनरल से पूछा, "मिस्टर सॉलिसिटर, मिस्टर स्वामी कह रहे हैं कि आपने राम सेतु मामले में काउंटर दाखिल करने की अपनी प्रतिबद्धता नहीं निभाई है ..." इस पर सॉलिसिटर ने कहा कि जवाब जल्द ही दाखिल किया जाएगा।
रामसेतु के अस्तित्व पर सवाल ?
उस सुनवाई में स्वामी ने कहा था कि उन्होंने मुकदमेबाजी का पहला दौर 'जीत' लिया है, जिसमें सरकार ने रामसेतु के अस्तित्व को स्वीकार किया था। उन्होंने दावा किया कि संबंधित केंद्रीय मंत्री ने उनकी मांग पर विचार करने के लिए 2017 में बैठक बुलाई थी लेकिन तब कुछ नहीं हुआ।
राम सेतु पर हिंदू धार्मिक समूहों का रवैया
बता दें कि स्वामी ने विवादास्पद सेतु समुद्रम जहाज चैनल परियोजना के संबंध में राम सेतु का मुद्दा उठाया था। उन्होंने तर्क दिया था कि यह चूना पत्थर के शोल (limestone shoals) को नुकसान पहुंचाएगा। सेतु समुद्रम का विरोध हिंदू धार्मिक समूहों की ओर से भी सामने आया।
वैकल्पिक मार्ग तलाशने का प्रयास
परियोजना का उद्घाटन लगभग 18 साल पहले 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार ने किया था। भाजपा के नेतृत्व में वर्तमान सरकार ने कहा, उसने 'सामाजिक-आर्थिक नुकसान' पर विचार किया है और एक वैकल्पिक मार्ग तलाशने को तैयार है।
क्या है पूरा विवाद
बता दें कि सेतु समुद्रम परियोजना की शर्तों के तहत 83-किमी का एक जल चैनल बनाया जाना है। चैनल मन्नार द्वीप (श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट से दूर) और पाक जलडमरूमध्य में व्यापक रूप से ड्रेजिंग और चूना पत्थर के शोलों को हटाने से जुड़ा है। लोगों का दावा है कि परियोजना से समुद्री जीवन व्यापक रूप से प्रभावित कर सकता है। दिलचस्प है कि तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट से दूर चूना पत्थर की एक श्रृंखला राम सेतु के रूप में लोकप्रिय है। इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किए जाने की मांग की जा रही है।












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