Ram Manohar Lohia Jayanti: राम मनोहर लोहिया क्यों नहीं मनाते थे जन्मदिन? क्या था सप्त क्रांति का सिद्धांत?
Ram Manohar Lohia Jayanti: आज महान स्वतंत्रता सेनानी और विचारक राम मनोहर लोहिया का जन्मदिन है, जो कि हिंदुस्तान की राजनीति में बेहद प्रखर और मुखर नेता के रूप में याद किए जाते हैं। उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में जन्में लोहिया ने 1927 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की।1929 में, उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के अधीन विद्यासागर कॉलेज से कला स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी।
पंडित नेहरू से चुनाव से हारकर भी कांग्रेस के चुनौती बने राम मनोहर लोहिया कभी भी अपना जन्मदिन नहीं मनाते थे क्योंकि 1931 में सरदार भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु का इसी दिन बलिदान हुआ था।

उनका मानना था कि 'व्यक्ति का जन्मदिन मनाने से ज्यादा जरूरी है समाज और देश के लिए काम करना। सादगीपूर्ण जीवन में विश्वास रखने वाले लोहिया निजी उत्सवों से दूर रहते थे, उनका मानना था कि "जब देश में गरीबी और असमानता है, तब व्यक्तिगत जश्न उचित नहीं।'
Ram Manohar Lohia ke Vichar: क्या था सप्त क्रांति का सिद्धांत?
- समानता का सिद्धांत: वो कहते थे कि समाज में जाति, वर्ग और लिंग के आधार पर भेदभाव खत्म होना चाहिए, उन्होंने सप्त क्रांति की बात की थी, जो कि निम्नलिखित है...
- स्त्री-पुरुष समानता: महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए।
- जातिवाद का अंत: जाति के आधार पर भेदभाव और ऊंच-नीच को समाप्त करना।
- आर्थिक असमानता खत्म करना: गरीब और अमीर के बीच की खाई को कम करना, संसाधनों का समान वितरण।
- रंगभेद के खिलाफ क्रांति: त्वचा के रंग या नस्ल के आधार पर होने वाले भेदभाव का विरोध।
- निजी पूंजी और शोषण के खिलाफ क्रांति: पूंजीवाद के कारण होने वाले शोषण को खत्म कर समाजवादी व्यवस्था लाना।
- विदेशी प्रभुत्व के खिलाफ क्रांति: किसी भी प्रकार के साम्राज्यवाद और बाहरी नियंत्रण का विरोध।
- मानसिक गुलामी के खिलाफ क्रांति: लोगों के सोच में बदलाव लाना, हीन भावना और अंधानुकरण से मुक्ति दिलाना।
Ram Manohar Lohia Slogan: राम मनोहर लोहिया के प्रसिद्ध स्लोगन
- संसोपा ने बांधी गांठ, पिछड़े पावें सौ में साठ
- जिंदा कौमें पांच साल तक इंतजार नहीं करतीं
- पिछड़ा पावे सौ में साठ
- अंग्रेजी हटाओ, देश बचाओ












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