किसान आंदोलन खत्म करने पर सरकार ने दिया प्रस्ताव, राकेश टिकैत बोले- चिट्ठी पर कौन विश्वास करेगा?
नई दिल्ली, 07 दिसंबर: किसानों के आक्रोश को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपने तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिए हैं। करीब एक साल से तीनों कृषि कानून के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी था। हालांकि कृषि कानून वापस होने के बाद भी किसान आंदोलन स्थल पर एकजुट होकर बैठे हैं। इस बीच किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश ने टिकैत ने मंगलवार को आंदोलन खत्म करने पर सरकार के प्रस्ताव के बारे में जानकारी दी।

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राकेश टिकैत ने कहा कौन विश्वास करेगा?
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार की ओर से प्रस्ताव दिया गया था कि सारी बातें मान ली जाएंगी। आप उठ जाइए। MSP पर कमेटी बनाएंगे। लेकिन कुछ स्पष्ट नहीं है। कल 2 बजे फिर से चर्चा होगी। केस वापसी को लेकर प्रस्ताव है कि केस वापस ले लिए जाएंगे, आप उठ जाइए। लेकिन चिट्ठी पर कौन विश्वास करेगा?
'सरकार का प्रस्ताव स्पष्ट नहीं'
राकेश टिकैत ने बताया कि सरकार ने प्रस्ताव दिया कि वे हमारी मांगों पर सहमत होंगे और हमें अपना आंदोलन समाप्त कर देना चाहिए, लेकिन प्रस्ताव स्पष्ट नहीं है। हमें अपनी आशंका है जिस पर कल दोपहर 2 बजे चर्चा होगी। हमारा आंदोलन कहीं नहीं जा रहा, यहीं रहेगा। टिकैत ने आगे बताया कि सरकार एक साल से ऐसा कह रही है, लेकिन कोई भी घर नहीं जा रहा है जब तक कि सब कुछ हल नहीं हो जाता।
पंजाब मॉडल लागू करें केंद्र सरकार
वहीं संयुक्त किसान मोर्चा के नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि आंदोलन में 700 से अधिक किसानों ने जान गंवाई है, जिनके लिए पंजाब सरकार ने 5 लाख रुपये मुआवजा और परिवार में एक को सरकारी नौकरी की बात की है। यही मॉडल केंद्र सरकार को भी लागू करना चाहिए।
आंदोलन खत्म होने के बाद शुरू होगा सरकार का कदम
संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कि सरकार का प्रस्ताव कहता है कि जब हम आंदोलन समाप्त करेंगे, तभी वे (किसानों के खिलाफ) मामले वापस लेंगे। हम इसके बारे में आशंकित हैं। सरकार को तुरंत (मामलों की वापसी) प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। बुधवार की बैठक में दोपहर दो बजे अंतिम फैसला होगा। किसान संगठन ने कहा कि जो केस वापस लेने की बात है, उस पर सरकार की तरफ से कहा गया है कि आंदोलन वापस लेने के बाद केस वापस लेने की शुरुआत होगी। हरियाणा में 48,000 लोगों पर मामले दर्ज हैं और भी देशभर में मामले दर्ज हैं। सरकार को तुरंत मामले वापस लेने की शुरुआत करनी चाहिए।












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