राज्यसभा से भी पारित हुआ आरक्षण बिल, राज्यों को मिलेगी अपनी ओबीसी सूची बनाने की शक्ति
नई दिल्ली,अगस्त 11: राज्यों को ओबीसी आरक्षण सूची तैयार करने का अधिकार देने वाले 127वें संविधान संशोधन विधेयक को राज्यसभा की मंजूरी मिल गई है। इससे पहले ये बिल लोकसभा में लाया गया था, जहां से मंगलवार को ये बिल पारित हो गया। पूरे विपक्ष ने लोकसभा में बिल का समर्थन किया था और राज्यसभा में भी विपक्ष ने बिल का समर्थन किया। यह विधेयक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की अपनी ओबीसी सूची बनाने की शक्ति को बहाल करने के लिए लाया गया था।
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राज्यसभा में राज्यों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की जातियों की पहचान करने और सूची बनाने का अधिकार बहाल करने वाला 'संविधान (127वां संशोधन ) विधेयक, 2021 पास होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। जहां उसे मंजूरी मिलते ही राज्य अपने यहां ओबीसी जातियों की लिस्ट खुद तैयार करा सकेंगे। इसके लिए राज्यों को केंद्र पर नहीं निर्भर रहना होगा। लोकसभा में बिल यह बिल पहले ही पास हो चुका है।
हाल ही में महाराष्ट्र सरकार की ओर से दिए गए मराठा कोटे को सुप्रीम कोर्ट से खारिज किए जाने के बाद केंद्र सरकार यह विधेयक लाई थी। इससे महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की राह आसान होगी। राज्यसभा में इस बिल पर शांति से चर्चा हुई और इस विपक्षी सदस्यों ने कोई हंगामा नहीं किया। मॉनसून सत्र में यह दूसरी बार है जब इस उच्च सदन में चर्चा के दौरान हंगामा नहीं हुआ।
कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में ओबीसी आरक्षण विधेयक का समर्थन किया था। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि हम विधेयक का समर्थन करते हैं। हम मांग करते हैं कि 50 फीसदी की सीमा को हटाने पर भी विचार किया जाए। कांग्रेस का कहना है कि यह सीमा हटने के बाद ही मराठा समुदाय और अन्य राज्यों में लोगों को इसका फायदा मिल पाएगा। कांग्रेस ने बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि एक पुरानी गलती ठीक की गई है। कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, देर आए दुरुस्त आए। 2018 में संशोधन लाकर देश के हर राज्य का अधिकार क्षेत्र खत्म केंद्र ने खत्म कर दिया था। वही गलती अब सरकार सुधार रही है।












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