राज्यसभा में नहीं थम रहा हंगामा, सदन ने अब तक 52.30 फीसदी समय गंवाया
नई दिल्ली, 05 दिसंबर: संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है, लेकिन राज्यसभा में सांसदों का गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। विपक्ष के 12 सांसदों के राज्यसभा की कार्यवाही के निलंबन के बाद से सदन में हंगामा मचा हुआ है। इस बीच रविवार को न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया कि विपक्षी दलों के लगातार विरोध 'व्यवधानों और जबरन स्थगन' के कारण संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के दौरान राज्यसभा को निर्धारित बैठक का 52.30 प्रतिशत समय गंवाना पड़ा।

हालांकि स्थिति सामान्य होती दिख रही थी, क्योंकि 3 दिसंबर को समाप्त सप्ताह के आखिरी दो दिनों में उच्च सदन में उत्पादकता(कामकाज) 95 प्रतिशत से ऊपर रही। इसकी भी एएनआई ने जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार को 100 प्रतिशत की सबसे अच्छा कामकाज दर्ज किया गया। सोमवार (29 नवंबर) को संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने के बाद से विपक्षी दलों के सदस्यों के विरोध के कारण दोनों सदनों के कामकाज में लगातार व्यवधान आ रहा है।
सरकार द्वारा लाए गए एक प्रस्ताव के बाद सोमवार को पहले ही दिन राज्य सभा में उनके 12 सांसदों को शीतकालीन सत्र से निलंबित कर दिया गया। अगस्त में मानसून सत्र के अंत में कथित रूप से अनियंत्रित आचरण के लिए सांसदों को निलंबित कर दिया गया था, जब विपक्षी नेताओं द्वारा सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक, 2021 के पारित होने के दौरान सदन के वेल में धावा बोलने के बाद मार्शल को बुलाया गया था। निलंबित राज्यसभा सांसदों में कांग्रेस के छह सदस्य हैं, जिसमें फूलो देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन और अखिलेश प्रसाद सिंह है। वहीं डोला सेन और शांता छेत्री तृणमूल कांग्रेस से, शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई, भाकपा के बिनॉय विश्वम और माकपा नेता इलामाराम करीम का नाम है।
बता दें कि शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने कुछ विपक्षी नेताओं और मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श किया और दोनों पक्षों से सदन के 12 सदस्यों के निलंबन की उनकी मांग के मद्देनजर अपने कथित विचारों पर आगे चर्चा करने का आग्रह किया। मालूम हो कि शीतकालीन सत्र 29 नवंबर को शुरू हुआ, जिसके 23 दिसंबर को समाप्त होने की संभावना है।












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