Rajinikanth Dada Saheb Phalke Award 2021: बस कंडक्टर से दादासाहब फाल्के अवॉर्ड तक, हर जगह छाया 'कबाली'

नई दिल्ली। तमिल सिनेमा के भगवान कहे जाने वाले रजनीकांत को भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान 'दादासाहब फाल्के अवॉर्ड' देने की घोषणा हुई है। सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ये जानकारी दी। आपको बता दें कि रजनीकांत 5 दशकों से सिल्वर स्क्रीन और लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं। 12 दिसंबर 1950 को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में जन्मे रजनीकांत ने अपनी ऐतिहासिक फिल्म 'शिवाजी' के लिए 26 करोड़ रु लिए थे, जिसके बाद वो एशिया में जैकी चैन के बाद सबसे ज्यादा पैसे लेने वाले कलाकार बन गए थे। साउथ हो या हिंदी सिनेमा रजनीकांत जहां भी आए, वहां पर छाए।

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    तमिल फिल्म अपूर्वा रागंगाल

    आइए एक नजर डालते हैं उनके अब तक के फिल्मी सफर पर ..

    एक सिंपल से बस कंडक्टर से अपनी जीविका की शुरूआत करने वाले रजनीकांत आज भी फिल्मों में सक्रिय हैं। उनका असली नाम 'शिवाजीराव गायकवाड़ रजनी' है, उनके पिता रामोजी राव गायकवाड़ एक हवलदार थे, घर की माली हालत ठीक नहीं थी। मां जीजाबाई की मौत के बाद चार भाई-बहनों में सबसे छोटे रजनीकांत ने परिवार को सहारा देने के लिए 'कुली' का भी काम किया और इसके बाद वो बेंगलुरू ट्रांसपोर्ट सर्विसेज में कंडक्टर बन गए थे।

    बस कंडक्टर से दादासाहब फाल्के अवॉर्ड तक, हर जगह छाया कबाली

    लेकिन ये काम उन्हें रास नहीं आया और इसलिए उन्होंने 1973 में मद्रास फिल्म संस्थान में दाखिला लिया और अभिनय में डिप्लोमा लिया। रजनीकांत की मुलाकात एक नाटक के मंचन के दौरान फिल्म निर्देशक के. बालाचंदर से हुई और यहीं से उनकी लाइफ ने अनोखा मोड़ लिया।

    तमिल फिल्म 'अपूर्वा रागंगाल' से मिला ब्रेक

    बालाचंदर ने रजनीकांत से प्रभावित होकर तमिल फिल्म 'अपूर्वा रागंगाल' (1975) में रजनी को ब्रेक दिया, जिसमें उनका रोल खलनायक वाला था। फिल्म ने सफलता का नया इतिहास लिखा था, फिल्म ने नेशनल अवार्ड जीता और रजनीकांत लोगों के दिलों पर छा गए और इसी वजह से रजनीकांत हमेशा बालाचंदर को अपना पिता का दर्जा देते हैं। इसके बाद रजनीकांत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अनिथन , अदिक्कथवन , श्री भरत, एल्ऐकरन , गुरु षिश्यनऔर ढर्मथिन ठल्ऐव उनकी यादगारे फिल्में हैं।

    तमिल फिल्म अपूर्वा रागंगाल

    रजनी की हिंदी फिल्में कम ही आई जिसमें अंधा कानून , हम, चालबाज और फूल बने अंगारे काफी चर्चित रहीं। लोग उनकी फिल्मों का बेसब्री से इंतजार करते है। उनका सिगरेट पीने का ढंग, कॉलर उठाकर दुश्मनों को पीटना आज भी किसी को रोमांचित कर जाता है।

    बस कंडक्टर से दादासाहब फाल्के अवॉर्ड तक, हर जगह छाया कबाली

    मालूम हो कि इससे पहले साल 2014 में रजनीकांत 6 तमिलनाडु स्टेट फिल्म अवार्ड्स से नवाजे गए थे। जिनमें से 4 पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के और दो स्पेशल अवार्ड्स थे। साल 2000 में उन्हें 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया था ,तो वहीं 45वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में रजनीकांत को 'सेंटेनरी अवॉर्ड फॉर इंडियन फिल्म पर्सन ऑफ द ईयर' से सम्मानित किया गया था।

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