Rajasthan: राज्यपाल बोले, इस वजह से सभी विधायकों को विधानसभा सत्र में बुलाना मुश्किल
नई दिल्ली। राजस्थान में चल रहे सियासी संकट के बीच सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्र ने प्रदेश सरकार से विधानसभा सत्र को बुलाने के प्रस्ताव पर सुझाव मांगा है। सूत्रों की मानें तो राज्यपाल ने प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार से पूछा है कि क्या आप विश्वास प्रस्ताव पेश करना चाहते हैं। हालांकि इस बात का जिक्र आपके प्रस्ताव में नहीं किया गया है, लेकिन मीडिया में आप इस बाबत बात कर रहे हैं। इसके अलावा राज्यपाल ने कहा है कि कोरोना महामारी संकट के समय विधानसभा सत्र में सभी विधायकों को बुला पाना मुश्किल होगा। क्या आप सत्र को शुरू करने के लिए 21 दिन का नोटिस दे सकते हैं।
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बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को राज्यपाल कलराज मिश्रा को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें विधानसभा का सत्र बुलाने की बात कही गई है लेकिन इसमें फ्लोर टेस्ट का जिक्र नहीं है। सीएम ने प्रस्ताव में लिखा है कि विधानसभा सत्र का एजेंडा कोरोना वायरस है, गहलोत 31 जुलाई से विधानसभा का सत्र बुलाना चाहते हैं,इस बारे में बात करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वह नए प्रस्ताव की जांच-पड़ताल कर रहे हैं, बता दें कि इससे पहले, राज्यपाल एक प्रस्ताव को खारिज कर चुके हैं। अशोक गहलोत ने कहा था कि राज्यपाल ऊपरी दबाव के कारण असेंबली नहीं बुला रहे हैं, पूरी जनता देख रही है कि आखिर राजस्थान में हो क्या रहा है, गौरतलब है कि शनिवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को नेताओं ने प्रदर्शन भी किया था।
रविवार को कांग्रेस ने राज्यपाल कलराज मिश्रा पर जमकर आरोप लगाया था, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि राज्यपाल मंत्री परिषद की सहायता और सलाह के साथ कार्य कर रहे हैं, लेकिन वह अपने आकाओं की आवाज सुन रहे हैं। सिंघवी ने कहा, यह काफी दिलचस्प बात है कि विधानसभा का सत्र बुलाए जाने से पहले राज्यपाल ने विधायक की गतिविधि, उनकी हाजिरी और अन्य मुद्दे अपने सवाल में उठाए हैं, जो कि उनके अधिकार क्षेत्र में आता ही नहीं है।












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